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अपनी बच्ची मांग रही इस महिला पर ही सख्त हुई पुलिस

पिता द्वारा बच्ची से रेप

नमस्कार दोस्तों, फोर्थ आई न्यूज़ में आप सभी का स्वागत है। दोस्तों आज हम आपको एक ऐसी खबर बताने जा रहे हैं जिसके बाद आप भी सोचने को मजबूर हो जाएंगे कि यह सब हमारे छत्तीसगढ़ में ही हो रहा है ? पहले आपको पूरा मामला बता देते हैं यह घटना हमारे प्रदेश की न्यायधानी कहे जाने वाले बिलासपुर शहर में घटी है।

इस घटना में तीन किरदार हैं एक माँ जो अपनी बच्ची को वापस पाने की गुहार लगा रही है एक उसका पति जो अपनी ही बच्ची पर बदनीयत रखता है वहीं तीसरी और अहम किरदार वो बच्ची जो अपने बाप के वहशीपन और अपनी माँ के पास जाने की आस के बीच जूझ रही है। बच्ची की माँ एक कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती है वो सकरी क्षेत्र की रहने वाली है जो गृहिणी हैं। महिला की शादी साल 2008 में रायगढ़ में रहने वाले एक फैक्ट्री संचालक से हुई थी। शादी के बाद उनकी बेटी हुई लेकिन, पति-पत्नी के बीच संबंध ठीक नहीं थे। पत्नी का कहना है कि पति बिना बात के विवाद करता था। उसकी आए दिन की प्रताड़ना से तंग आकर महिला अपनी 9 साल की बेटी को लेकर बिलासपुर में अपने मायके में आकर रहने लगी थीं। महिला ने पुलिस को बताया कि बीते जुलाई माह से उसके पति की नीयत बेटी पर बिगड़ गई थी। उसने रायगढ़ में भी बेटी के साथ गलत हरकत की। जब महिला ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट की गई।

महिला के बिलासपुर आने के बाद उसका पति बेटी से मिलने के बहाने आता था। इस दौरान वह बेटी से अकेले मिलता था और गलत हरकतें करता। आरोप है कि इसी दौरान उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। SSP पारुल माथुर के निर्देश पर पुलिस ने आरोपी पिता के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। लेकिन, न तो उसकी गिरफ्तारी की गई और न ही बच्ची को मां के हवाले किया गया। इससे परेशान मां ने अपनी बेटी को पाने के लिए हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने एक सप्ताह के भीतर महिला के केस का निराकरण करने का आदेश दिया था। लेकिन, हाईकोर्ट के आदेश के एक माह बाद भी प्रकरण का निपटारा नहीं किया गया। इसके कारण महिला के अधिवक्ता ने अवमानना याचिका भी लगाई है।

अपनी बेटी को पाने की आस में लाचार मां पूरे दिन CWC ऑफिस में बैठीं रहीं। लेकिन, उन्हें बेटी से मिलने तक नहीं दिया गया। अब इस केस में राष्ट्रीय बाल आयोग ने भी सख्ती दिखाई है और कलेक्टर सौरभ कुमार को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगा है।शनिवार से धरने पर बैठीं महिला और आम आदमी पार्टी के साथ ही सामाजिक कार्यकर्ताओं को प्रशासन दबाव डालकर उठाने की कोशश करते रहे। शनिवार और रविवार अवकाश होने के कारण पुलिस भी शांत रही। हालांकि, SDM श्रीकांत वर्मा ने उन्हें धमकाकर कलेक्ट्रेट से हटने की चेतावनी दी थी। लेकिन, महिला और AAP के कार्यकर्ता अपनी जिद पर अड़े रहे। रविवार देर रात प्रशासन फिर से सक्रिय हुआ और रात करीब दो बजे महिला के मायकेवालों को लेकर धरना खत्म कराने की कोशिश में जुटे रहे।

महिला अपनी बच्ची के साथ ही जाने पर जिद पर अड़ी रही। फिर भी सुबह करीब चार बजे उन्हें मायकेवालों के साथ जबरिया उठा लिया गया। इधर, सोमवार की सुबह 10 बजे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को कोनी थाने भेज दिया गया। उनके खिलाफ धारा 151 के तहत प्रतिबंधात्मक कार्रवाई करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला समेत 13 लोगों को जेल भेज दिया गया। लेकिन, पुलिस ने रेप के आरोपी पिता की गिरफ्तारी नहीं की और न ही महिला को उसकी बच्ची लौटाने का प्रयास किया।

इधर बिलासपुर में इस हाई प्रोफाइल रेप केस में जिला प्रशासन आंदोलनकारियों पर सख्त हो गया। एक तरफ SDM ने बेबस मां को उसकी बेटी दिलाने का झांसा देकर चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) के पास भेज दिया। वहीं, दूसरी तरफ उनके साथ धरने पर बैठे AAP कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

इधर, धरने पर बैठी महिला के बारे में सिविल लाइन टीआई परिवेश तिवारी के साथ ही जिला प्रशासन ने बयान जारी कर बताया कि महिला अपने मायकेवालों के साथ चली गई है। लेकिन, महिला सोमवार को पूरे दिन सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ CWC के ऑफिस में अपनी बच्ची को पाने के लिए बैठीं इंतजार करती रहीं। न तो उन्हें बच्ची से मिलने दिया गया और न ही उनकी बच्ची को लौटाया गया। जबकि महिला का कहना है कि उसका पति उद्योगपति है और प्रभावशाली भी है। CWC ने महिला पर बच्ची को भड़काने और बहलाकर डबाव डालकर गलत बयान देने का आरोप लगाया है, जिसके कारण बच्ची को उसकी मां के हवाले नहीं किया जा रहा है। लेकिन, CWC ने बच्ची को रायगढ़ भेजने का आदेश जारी कर दिया है।

महिला का कहना है कि रायगढ़ में उसका पति रहता है, जहां बच्ची की जान को खतरा हो सकता है। इसका उन्होंने विरोध किया, तब CWC ने उनकी बातों को नजरअंदाज कर दिया। कहीं से कोई सहायता नहीं मिलने पर वह अपनी बेटी को पाने के लिए धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा।

अब इस हाई प्रोफाइल केस में राष्ट्रीय बाल आयोग ने सख्ती दिखाई है। बाल आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स पर जानकारी लेते हुए कलेक्टर सौरभ कुमार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने माना है कि इस केस में पोक्सो अधिनियम की धाराओं का उल्लंघन किया गया है। पीड़ित की गोपनीयता और पहचान तय करते हुए हर स्तर पर यह सुनिश्चित करते हुए पोक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए अपनी जांच और दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट तीन दिन के भीतर भेजने के लिए कहा है। इस पूरे मामले को आप किस तरह से देखते हैं क्या वाकई इस महिला के साथ अन्याय हो रहा है और ऐसे संगीन आरोप लगने के बाद भी पुलिस आरोपी को क्यों नहीं पकड़ रही है।

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