पंजाब के मानसा में नशे के कारोबारियों का पर्दाफाश करने वाले प्रमुख एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की सरेआम दिनदहाड़े हत्या कर दी गई, जिसके बाद पूरे पंजाब में भयंकर बवाल कट गया है। गुस्साए समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर मेडिकल स्टोर्स में तोड़फोड़ की और परिजन शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार करते हुए धरने पर बैठ गए। हालांकि राजस्थान के सालासर से मुख्य आरोपी को दबोच लिया गया है, लेकिन इससे आक्रोश ठंडा नहीं पड़ा है।
पंजाब में नशे के खुले नंगनाच और कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने को लेकर भगवंत मान सरकार विपक्ष के सीधे निशाने पर आ गई है। विपक्षी दलों का सीधा आरोप है कि जब ड्रग माफिया के खिलाफ आवाज उठाने वालों को सरेराह गोलियों से भून दिया जाएगा, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा? लुधियाना जेलों के अंदर से चल रहे ड्रग और मोबाइल रैकेट का खुलासा होने के बाद यह मामला और ज्यादा तूल पकड़ चुका है।
जब रक्षक ही मौन हो जाएं और नशा माफिया बेखौफ होकर हत्याएं करने लगे, तो फिर जनता का सड़कों पर उतरकर बदला लेना लाजमी है। यह हत्या सिर्फ एक इंसान की नहीं, बल्कि पंजाब के प्रशासनिक इकबाल का सरेआम कत्ल है!
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