जुए के फड़ में महापौर के जेठ और रसूखदार धराए, क्वाइनों में लग रहे थे लाखों के दांव
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाई-प्रोफाइल जुए का फड़ उजागर!

बिलासपुर | शहर की चमकती सड़कों और सत्ता की ऊंची दीवारों के पीछे, एक और ‘खेल’ चल रहा था—जुआ। लेकिन इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया। एसएसपी रजनेश सिंह को मिली पुख्ता जानकारी के बाद सरकंडा पुलिस की टीम ने कोनी रोड पर महावीर अग्रवाल के बाड़े में छापा मारा। वहां का नजारा चौंका देने वाला था। ताश की गड्डियां, कैश की गड्डियां और क्वाइन में बदले जा रहे लाखों—जुए का हाई-प्रोफाइल अड्डा चल रहा था।
क्वाइन से खेला जा रहा था करोड़ों का ‘सट्टा’!
पुलिस को यहां कैश के साथ-साथ क्वाइन भी मिले। इन क्वाइनों का इस्तेमाल ‘कोड वेल्यू’ में किया जा रहा था—5 हजार से लेकर 50 हजार रुपए तक के दांव इन क्वाइनों में लगाए जा रहे थे। कारोबारी अब सीधे कैश नहीं रखते, बल्कि क्वाइन की आड़ में जुए की रकम छिपाते हैं।
छापा पड़ा तो रसूखदारों में मची खलबली, थाने में फोन और सिफारिशों की बौछार
पकड़े गए नौ जुआरियों में एक नाम है विजय विधानी, जो बिलासपुर की महापौर पूजा विधानी के जेठ हैं। इसके अलावा भाजपा नेताओं के करीबी, पीडब्ल्यूडी के ठेकेदार पारूल राय (जो नाम बदलकर पारस राय बन गए), टाइल्स, फर्नीचर और होटल व्यवसायी भी इस फड़ में रंगे हाथों पकड़े गए।
रेड के बाद पुलिस थाने में रसूखदारों के फोन घनघनाने लगे—नेताओं से लेकर अफसरों तक को आरोपियों को बचाने के लिए कॉल किए गए। लेकिन एसएसपी रजनेश सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा—”कानून से ऊपर कोई नहीं, किसी पर रहम नहीं किया जाएगा।”
गिरफ्त में आए रसूखदार—यह है पूरी लिस्ट: नाम पेशा/पहचान
रमेश कुमार अग्रवाल (70) अग्रसेन चौक निवासी, कारोबारी
सुशील अग्रवाल (60) पुराने सरकंडा निवासी, रसूखदार परिवार
चंद्रशेखर अग्रवाल (64) अकलतरा निवासी, बागड़िया टाइल्स
विजय विधानी (64) महापौर के जेठ
हरवंश लाल (79) दयालबंद निवासी, होटल कारोबारी
बिहारी ताम्रकार (66) भाजपा कार्यालय के सामने रहने वाले व्यवसायी
तेजेश्वर वर्मा (40) गोड़पारा निवासी, व्यवसायी
सुनील अग्रवाल (60) फर्नीचर व्यवसायी
पारस राय उर्फ पारूल राय (48) पीडब्ल्यूडी ठेकेदार, नाम छिपाने की कोशिश
पुलिस की कार्रवाई बनी नजीर
इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि चाहे कोई कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो, कानून की पकड़ से नहीं बच सकता। पुलिस ने मौके से ₹41,500 नकद, क्वाइनों की पेटी, 11 मोबाइल और ताश की गड्डियां जब्त की हैं। क्वाइनों की असल कीमत का आकलन फिलहाल नहीं हो पाया है।
अब आगे क्या?
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। नाम छिपाने की कोशिश करने वालों पर अलग से कार्रवाई होगी। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या जुए के इन अड्डों को राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था? आने वाले दिनों में इस केस की आंच कई और चेहरों को बेनकाब कर सकती है।