छत्तीसगढ़

साहित्य- संस्कृति कर्मियों की मौजूदगी में शुरू हुआ रजवार चित्रकला शिविर

आदिवासी लोक कला अकादमी, छत्तीसगढ़ संस्कृति परिषद् रायपुर द्वारा आज 10.10.2022 से राजधानी के महन्त घासीदास संग्रहालय की कला वीथिका में 10 दिवसीय रजवार चित्रकला शिविर का शुभारम्भ हुआ।
शिविर के शुभारम्भ मौके पर आदिवासी लोक कला अकादमी के अध्यक्ष नवल शुक्ला,साहित्य अकादमी के अध्यक्ष ईश्वर सिंह दोस्त, कवी एवं लेखक देवी प्रसाद मिश्र, रंगकर्मी अनूप रंजन पांडे, कला अकादमी के अध्यक्ष एवं  चित्रकार योगेंद्र त्रिपाठी, संस्कृति कर्मी ज्ञानदेव सिंह , श्याम सुन्दर एवं राजेंद्र संगरिया उपस्थित थे।

गौरतलब हो कि यह रजवार चित्रकला शिविर 18 अक्टूबर तक चलेगा। जिसमे प्रतिभागी चित्रकार विशिष्ट भित्ति चित्र का निर्माण करेंगे। छत्तीसगढ़ की पहचान को रेखांकित करने वाले इस विशिष्ट चित्रकला शैली के दस कलाकार पहली बार इतने दिनों के लिए एकसाथ कला विथिका में एकत्र हुए है। शिविर में जो दस कलाकारों शामिल है, वे हैं- बुधनी राजवाड़े, पंडित राम, सहोदरी बाई, रामकरन राम, भगत राम, कुदरराम, अमित कुमार, संदीप कुमार, पार्वती और बेलपती। इस शिविर में बने चित्रों की प्रदर्शनी 18 अक्टूबर को आयोजित की जाएगी।

यह पहला अवसर होगा जब रजवार चित्रों की प्रदर्शनी कला दीर्घा में आयोजित की जायेगी। राजधानी में रजवार चित्रों की प्रदर्शनी के बाद चित्रों की प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ के अन्य शहरों और प्रदेश के बाहर भी आयोजित की जाएगी।
आदिवासी लोककला अकादमी के अध्यक्ष नवल शुक्ल ने इस अवसर पर कहा कि- छत्तीसगढ़ की इस विशिष्ट चित्रकला शैली को पहचान, प्रोत्साहन और सम्मान देने की पहल आदिवासी लोक कला अकादमी द्वारा की गई है।

ऐसी गतिविधियां छत्तीसगढ़ के अन्य आदिवासी और लोक कला रूपों पर आगे भी करते रहने की योजना है ताकि प्रदेश के जनजातीय और लोक कला रूपों को समुचित प्रतिष्ठा मिल सके।रजवार चित्रकारी भित्ती चित्रकारी की एक विशिष्ट शैली है जो छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में विशेष रूप से प्रचलित है। यह एक ऐसी परंपरा है जो छत्तीसगढ़ की संस्कृति को भित्ती चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इस भित्ती चित्र के माध्यम से प्रकृति एवं ग्रामीण परिवेश का चित्रण किया जाता है। यह एक पारंपरिक भित्ती चित्र शैली है।

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