ट्रंप और नेतन्याहू में दरार! इजरायल ने ठुकराया अमेरिकी 15-सूत्री शांति प्लान!

क्या इजरायल अब अमेरिका की बात भी नहीं सुन रहा है? वर्षों से वाशिंगटन की गोद में बैठकर अपनी रक्षा नीतियां तय करने वाला तेल अवीव क्या अब अपने सबसे बड़े मददगार को आंखें दिखा रहा है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए 15-सूत्रीय गाजा शांति खाके को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा सीधे तौर पर खारिज किए जाने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में अब तक की सबसे बड़ी दरार देखने को मिल रही है।
मुख्य घटनाक्रम:
शांति प्रस्ताव खारिज: इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हमास पूरी तरह निशस्त्र नहीं हो जाता, तब तक इजरायली सेना गाजा से एक इंच भी पीछे नहीं हटेगी।
ट्रंप की योजना पर पानी: अमेरिकी प्रशासन गाजा में युद्धविराम, पुनर्निर्माण और एक अंतरिम बहुराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती के जरिए युद्ध को खत्म करना चाहता था।
व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया: ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनके और नेतन्याहू के संबंध ठीक हैं, लेकिन वाशिंगटन के भीतर इजरायल के अड़ियल रवैये को लेकर गहरा असंतोष है।
युद्ध की पृष्ठभूमि:
अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ गाजा संघर्ष अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच चुका है जहाँ सैन्य जीत की परिभाषा ही धुंधली पड़ गई है। अमेरिका ने अरब जगत के साथ रिश्तों को संतुलित करने और होर्मुज व लाल सागर के आर्थिक दबाव को कम करने के लिए यह 15-सूत्रीय प्लान तैयार किया था। लेकिन इजरायल में दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार के राजनीतिक अस्तित्व के लिए यह युद्धविराम एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
दावे और हकीकत:
इजरायल का दावा है कि बिना पूर्ण सैन्य सफाए के किसी भी तरह का समझौता भविष्य में 7 अक्टूबर जैसे हमलों की दोबारा नींव रखेगा। वहीं, अमेरिका का मानना है कि गाजा में स्थायी सैन्य कब्जा इजरायल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह अलग-थलग कर देगा और अमेरिका के अपने सामरिक हितों को नुकसान पहुँचाएगा।
भारत पर असर:
भारत के संबंध इजरायल और अरब देशों दोनों के साथ बेहद रणनीतिक हैं। गाजा में जारी संघर्ष के कारण ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा’ (IMEC) रुका पड़ा है। अमेरिका-इजरायल के बीच का यह मतभेद क्षेत्र में अनिश्चितता को लंबा खींचता है, जिससे भारत की समुद्री व्यापार सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
सबसे बड़ा सवाल:
क्या इजरायल अमेरिका की सैन्य और वित्तीय बैकिंग के बिना गाजा में अनिश्चितकालीन युद्ध जारी रख पाएगा, या फिर ट्रंप प्रशासन इजरायल पर नकेल कसने के लिए कड़े कदम उठाने पर मजबूर होगा?


