सुप्रीम कोर्ट ने लगाई केंद्र सरकार की क्लास! NCLT और ट्रिब्यूनलों की बदहाली पर CJI का करारा तमाचा

सुप्रीम कोर्ट ने देश के नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और NCLAT के खस्ताहाल इंफ्रास्ट्रक्चर और भारी खाली पदों को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को जमकर लताड़ लगाई है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली पीठ ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि हजारों करोड़ों रुपये के कॉर्पोरेट मुकदमों और बैंकिंग मुकदमों का निपटारा करने वाले इन ट्रिब्यूनलों के पास न तो बैठने की जगह है, न स्टाफ और न ही कोई तकनीकी सुविधाएं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत ने सरकार से सीधे सवाल दागे कि जब देश के बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स और बैंकों की अर्जी इन्हीं अदालतों के भरोसे है, तो उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक क्यों नहीं दी जा रही हैं? न जजमेंट लिखने वाले राइटर हैं, न बिल्डिंग्स और न तकनीकी सपोर्ट। अदालत का यह रूख सीधे तौर पर सरकार के खोखले वादों और नौकरशाही की ढिलाई की कलाई खोलता है।
अदालत का यह तमाचा यह साफ दिखाता है कि देश में आर्थिक सुधारों की ढोल पीटने वाले तंत्र की अंदरूनी हकीकत कितनी खोखली और लाचार हो चुकी है।



