24 साल पहले पुतिन की चेतावनी, जिसे दुनिया ने अनसुना किया: पाकिस्तान, परमाणु खतरा और भारत से जुड़ा सच

रूस के राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन को लेकर सामने आया एक पुराना लेकिन बेहद चौंकाने वाला दस्तावेज आज वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। अमेरिका ने सूचना के अधिकार कानून के तहत पुतिन का वह गोपनीय पत्र सार्वजनिक किया है, जो उन्होंने करीब 24 साल पहले तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को लिखा था।
इस पत्र में पुतिन ने पाकिस्तान को पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बताया था। उनका साफ कहना था कि पाकिस्तान एक सैन्य शासन के अधीन है, वहां लोकतंत्र कमजोर है और इसके बावजूद उसके पास परमाणु हथियार हैं—जो वैश्विक सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। पुतिन ने पश्चिमी देशों से अपील की थी कि पाकिस्तान को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं और इस मुद्दे पर खुली चर्चा की जाए।
पुतिन की यह चेतावनी भारत के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है। अगर उस वक्त उनकी बात को गंभीरता से लिया जाता, तो दक्षिण एशिया की राजनीति और सुरक्षा परिदृश्य आज बिल्कुल अलग होता। लेकिन अमेरिका और पश्चिमी देशों ने अपने रणनीतिक हितों के चलते पाकिस्तान को समर्थन देना जारी रखा।
दस्तावेजों में ए. क्यू. खान नेटवर्क का भी जिक्र है, जिसने न सिर्फ पाकिस्तान के लिए परमाणु हथियार विकसित किए, बल्कि ईरान, उत्तर कोरिया और लीबिया जैसे देशों तक परमाणु तकनीक पहुंचाई। पुतिन ने इसे दुनिया के लिए बड़ा खतरा बताया था।
पत्राचार में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी गहरी चिंता दिखाई देती है। पुतिन का कहना था कि ईरान के पास क्या है और वह कहां है, यह साफ नहीं है, लेकिन पाकिस्तान के साथ उसका सहयोग चिंता बढ़ाता है। जवाब में बुश ने स्वीकार किया था कि उन्होंने तत्कालीन पाक राष्ट्रपति मुशर्रफ से इस मुद्दे पर बात की थी, लेकिन पूरी सच्चाई सामने नहीं आई।
आज जब यह पत्र सार्वजनिक हुआ है, तो सवाल उठ रहा है—क्या दुनिया ने समय रहते उस चेतावनी को अनदेखा कर दिया, जिसकी कीमत आज भी वैश्विक सुरक्षा चुका रही है?



