उन्नाव केस में सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, किरण बेदी बोलीं– तकनीकी तर्कों ने न्याय को भटकाया

उन्नाव रेप केस में दोषी पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के बाद देशभर में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने शीर्ष अदालत के फैसले का खुलकर समर्थन किया है।
किरण बेदी ने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में गंभीर खामियां थीं और सबसे बड़ी भूल यह मानना था कि एक निर्वाचित विधायक पब्लिक सर्वेंट नहीं होता। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति चुनाव लड़ता है, सार्वजनिक धन से जुड़ा होता है और संविधान की शपथ लेता है, उसे पब्लिक सर्वेंट न मानना किस तर्क पर आधारित है।
उन्होंने पीड़िता के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि इस मामले में सिर्फ अपराध नहीं हुआ, बल्कि पीड़िता को लंबे समय तक अन्याय झेलना पड़ा। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी। बेदी ने इस लड़ाई में पीड़िता के साथ खड़े रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं और मीडिया की भी सराहना की।
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि तकनीकी आधार पर उम्रकैद की सजा पर रोक लगाना न्याय के साथ समझौता था। अपराध की गंभीरता को नजरअंदाज कर यह तर्क देना कि पीड़िता की उम्र या आरोपी की कानूनी हैसियत क्या थी, गलत है। उन्होंने कहा कि जनता का आक्रोश दरअसल न्याय की मांग था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरा किया।
किरण बेदी ने पीड़िता की बहादुरी को सलाम करते हुए कहा कि एक गरीब परिवार से आने के बावजूद उसने सच्चाई के लिए लड़ाई जारी रखी। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला उसी न्याय की पुष्टि है, जिसकी समाज को उम्मीद थी।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के उन्नाव रेप मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा निलंबित की गई थी। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि सेंगर को रिहा नहीं किया जाएगा।




