पटना : तेजस्वी को सीएम पद का चेहरा बनाने के लिए अभी कोई फैसला नहीं: कांग्रेस

पटना  : लोकसभा चुनाव से पहले बिहार की सियासत में उठापटक का दौर जारी है। इस पूरे सियासी शह और मात के खेल के बीच कांग्रेस ने कहा है कि वर्ष 2020 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव में सीएम पद के चेहरे के रूप में अभी तेजस्वी यादव के नाम पर कोई फैसला नहीं हुआ है। कांग्रेस ने कहा उसकी नजर अभी वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने शुक्रवार को तेजस्वी को सीएम पद का प्रत्याशी बनाए जाने पर कहा, अभी हम कुछ कह नहीं सकते हैं। हमारी पहली प्राथमिकता 2019 है और बिहार चुनाव 2020 में होने वाले हैं। हम देखेंगे कि उस समय गठबंधन कैसा होता है और तत्कालीन स्थिति कैसी रहती है। राहुल गांधी और लालू यादव जैसे नेता इस पर विचार विमर्श करेंगे।

बता दें कि राज्य में चल रहे सियासी खेल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी नेता तथा पूर्व डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव केंद्र बिंदु बने हुए हैं। यही नहीं 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने तैयारी तेज कर दी है। बिहार में एक तरफ जहां जेडीयू और बीजेपी में सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान जारी है, वहीं दूसरी तरफ तेजस्वी यादव भी महागठबंधन को मजबूत करने में जुट गए हैं।

2019 लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने तैयारी तेज कर दी है।

उधर, सीटों के बंटवारे को लेकर जेडी (यू)-बीजेपी के बीच रार के बीच कभी नीतीश के बेहद करीबी रहे और फिर बाद में सियासी दुश्मन बने मांझी ने उन्हें सशर्त महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव दे दिया है। मांझी ने कहा था कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री का पद छोडक़र महागठबंधन में शामिल हो जाते हैं तो तेजस्वी यादव 2020 में सीएम पद का चेहरा हो सकते हैं।

नीतीश की मंशा फिर से केंद्र में आने की पिछले कुछ दिनों से नीतीश कुमार एक बार फिर से बिहार की राजनीति के केंद्र में आने लगे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) सूत्रों के अनुसार पार्टी की यही मंशा भी थी। पार्टी के अनुसार जब से नीतीश ने राज्य की कमान संभाली है, तब से राज्य की राजनीति के केंद्र में वही रहे हैं

और बीजेपी को इस बात को स्वीकार करना होगा। सूत्रों के अनुसार अभी तुरंत राज्य की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा लेकिन इस बीच नीतीश कुमार अपनी खोई राजनीतिक साख और आधार पाने के लिए जरूर अपने स्टैंड को कड़ा करेंगे, जिससे बीजेपी और आरजेडी दोनों के सामने असहज स्थिति पैदा होना तय है।

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