खेल समाचार | क्रिकेट, फुटबॉल, ओलंपिक | Fourth Eye News।Sports

क्रिकेट के वो 5 ओपनर्स, जिनका नाम सुनते ही कांप उठते थे गेंदबाज

आधुनिक क्रिकेट में रफ्तार, पावर और इनोवेशन का बोलबाला है। बल्लेबाजी की शैली बदल चुकी है, लेकिन इतिहास में कुछ ऐसे ओपनर्स हुए हैं, जिनकी दहशत आज भी जिंदा है। ये वो नाम हैं, जिनके क्रीज पर आते ही गेंदबाज रणनीति भूल जाया करते थे। रन बनाना ही नहीं, बल्कि मैच पर कब्जा जमाना इनकी पहचान थी।

ऑस्ट्रेलिया के मैथ्यू हेडन मैदान पर उतरते ही गेंदबाजी आक्रमण की कमर तोड़ देते थे। शानदार तकनीक, दमदार टाइमिंग और लंबी पारियां उनकी ताकत थीं। जिम्बाब्वे के खिलाफ 380 रनों की ऐतिहासिक पारी आज भी खौफ की मिसाल है। 103 टेस्ट और 159 वनडे खेलकर हेडन ऑस्ट्रेलिया के स्वर्ण युग का चेहरा बने।

श्रीलंका के सनथ जयसूर्या ने ओपनिंग को ही नई परिभाषा दी। 1996 विश्व कप के बाद उनका बल्ला तूफान बन गया। पावरप्ले का सबसे खतरनाक इस्तेमाल जयसूर्या ने किया। छक्कों की बरसात और बेखौफ अंदाज ने उन्हें वनडे क्रिकेट का बेताज बादशाह बनाया। 445 वनडे मुकाबले उनकी महानता की कहानी कहते हैं।

सचिन तेंदुलकर सिर्फ बल्लेबाज नहीं, भरोसे का दूसरा नाम थे। ओपनर के तौर पर उन्होंने टेस्ट और वनडे में ऐसे मानक बनाए, जिन्हें छूना भी मुश्किल है। दबाव में रन बनाना, शतक जड़ना और टीम को संभालना उनकी पहचान रही। 90 के दशक से 2010 तक भारतीय क्रिकेट उनकी बल्लेबाजी के इर्द-गिर्द घूमता रहा।

दक्षिण अफ्रीका के ग्रीम स्मिथ ने बल्लेबाजी से ज्यादा अपने नेतृत्व से दुनिया को चौंकाया। 22 साल की उम्र में कप्तान बने और ओपनिंग करते हुए टीम को मजबूती दी। आक्रामक नहीं, लेकिन ठोस तकनीक और धैर्य से उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 27 शतक ठोके।

इंग्लैंड के एलेस्टर कूक क्लासिक टेस्ट बल्लेबाजी की आखिरी मजबूत कड़ी माने जाते हैं। 2018 में भारत के खिलाफ आखिरी टेस्ट में 71 और 147 रन बनाकर उन्होंने यादगार विदाई ली। सरल तकनीक, संयम और निरंतरता के दम पर उन्होंने इंग्लैंड को नई पहचान दी। उनके बाद आज तक इंग्लैंड को वैसा ओपनर नहीं मिल पाया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button