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आरक्षक भर्ती अब भी अधर में, आखिर कब आगे बढ़ेगी प्रक्रिया?

आज हम बात करेंगे छत्तीसगढ़ के उन हजारों युवाओं की, जिनका खाकी पहनने का सपना फिलहाल अदालती कार्रवाई और विवादों के बीच फंसा हुआ है। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ पुलिस आरक्षक भर्ती 2023-24 की। 6,000 के करीब पदों पर होने वाली इस भर्ती पर आखिर कोर्ट को क्यों रोक लगानी पड़ी? कब शुरू हुआ था यह सफर, क्या है भर्ती का विवादित इतिहास और वर्तमान में क्या है इसकी स्थिति यह सब हम आपको बताएँगे तो चलिए शुरुआत करते हैं….

छत्तीसगढ़ पुलिस में आरक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए इस भर्ती का विज्ञापन 6 अक्टूबर 2023 को जारी किया गया था। कुल 5,967 पदों के लिए आवेदन मंगाए गए थे। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 जनवरी 2024 से शुरू होकर 15 फरवरी 2024 तक चली। छत्तीसगढ़ में इससे पहले बड़ी आरक्षक भर्ती साल 2017-18 में हुई थी, लगभग 2,258 पद भरे जाने थे, जो काफी लंबे समय तक चली और नियुक्तियां 2021 तक पूरी हुईं। लंबे अंतराल के बाद आई इस 2023 की भर्ती से प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं को बड़ी उम्मीदें थीं। लेकिन भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही विवादों के घेरे में आ गई। बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता बेदराम टंडन और अन्य ने याचिका दायर की।

विवाद के मुख्य कारण

1.नियमों में शिथिलता: डीजी पुलिस ने एक पत्र लिखकर पुलिस विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चों को शारीरिक मापदंडों (जैसे सीने की चौड़ाई और ऊंचाई) में विशेष छूट देने का सुझाव दिया था।

2.समानता का अधिकार: याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि केवल विभाग के बच्चों को यह छूट देना आम युवाओं के साथ भेदभाव है और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

3.परिणामों में धांधली: जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने एक और बड़ा झटका दिया, जब फिजिकल टेस्ट के परिणामों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे। आरोप था कि मेरिट लिस्ट में पारदर्शिता नहीं बरती गई है।

वर्तमान स्थिति यह है कि बिलासपुर हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया के तहत नए नियुक्ति पत्र जारी करने पर रोक लगा दी है। जनवरी 2026 में जस्टिस राकेश मोहन पांडे की बेंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि फिलहाल कोई नई जॉइनिंग न दी जाए। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए शासन से जवाब मांगा है। लगभग 2,500 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र पहले ही जारी किए जा चुके थे, जिन पर अब तलवार लटक रही है। वहीँ भर्ती में ‘कट-ऑफ’ और ‘मेरिट लिस्ट’ को लेकर भी भारी विरोध है, जिसे लेकर मामला अभी न्यायालय के विचाराधीन है।

इस देरी और अनियमितता के खिलाफ छत्तीसगढ़ का युवा सड़कों पर भी उतरा। रायपुर में गृह मंत्री विजय शर्मा के बंगले का घेराव किया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने सालों तक मैदान में पसीना बहाया है, लेकिन पारदर्शिता न होने से उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है। वहीँ, सरकार और पुलिस विभाग का पक्ष है कि भर्ती नियमों के तहत ही की जा रही है और वे कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखेंगे।साफ है कि छत्तीसगढ़ आरक्षक भर्ती अब केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि एक कानूनी लड़ाई बन चुकी है। हजारों युवा अब भी इस इंतजार में हैं कि कब कोर्ट की रोक हटेगी और कब उन्हें अपनी मेहनत का फल मिलेगा। फिलहाल मामला कोर्ट में है और अगली सुनवाई ही तय करेगी कि यह खाकी का सपना कब सच होगा। इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि आरक्षक भर्ती अब तक प्रदेश में सही तरह से हो नहीं पाई है, कभी हो-हंगामे के चलते, कभी लेट-लतीफी तो कभी न्यायालीन आदेश, इन सबके बीच आरक्षक भर्ती पूरी ना हो पाने के पीछे आप क्या बड़ा कारण मानते हैं? अपनी राय हमें कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताएं,

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