दुनिया की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल, विश्व बैंक ने घटाई विकास दर की भविष्यवाणी

वैश्विक अर्थव्यवस्था एक बार फिर चुनौतीपूर्ण दौर में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। विश्व बैंक ने वर्ष 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास दर के अनुमान को घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले दुनिया की अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकिन मध्य पूर्व में जारी संघर्ष, ऊर्जा संकट और बढ़ती महंगाई ने आर्थिक चिंताओं को बढ़ा दिया है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार यदि युद्ध की स्थिति और बिगड़ती है तथा तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो वैश्विक विकास दर 1.3 प्रतिशत तक गिर सकती है। तेल की कीमतों में उछाल का असर दुनिया के लगभग हर देश पर पड़ सकता है। इससे परिवहन, उद्योग और आम उपभोक्ताओं के खर्च में बढ़ोतरी होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि विकासशील देशों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। कर्ज का बोझ, कम निवेश और धीमा व्यापार आने वाले वर्षों में बड़ी चुनौतियां बन सकते हैं। हालांकि भारत के लिए अच्छी खबर यह है कि देश 2026 में लगभग 6.6 प्रतिशत की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले समय में देशों को ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए नए कदम उठाने होंगे।




