जंग के मैदान में भी भारत का परचम! इजराइल और खाड़ी देशों ने भारत के आगे बिछाया रेड कार्पेट, भारत बना ग्लोबल सप्लाई चेन का बॉस

श्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच भारत के आर्थिक और रणनीतिक कद में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिला है। जहाँ अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाएं और सप्लाई चेन बुरी तरह ध्वस्त हो रही हैं, वहीं इजराइल और मध्य पूर्व के प्रमुख देशों ने भारत को दुनिया का सबसे भरोसेमंद साझेदार मानते हुए बड़े आर्थिक व रणनीतिक समझौतों की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बैठकों के बाद यह साफ हो गया है कि इजराइल अपनी अत्याधुनिक क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और रक्षा आपूर्ति शृंखला का बड़ा हिस्सा भारत में स्थानांतरित करने की योजना पर तेजी से काम कर रहा है।
इस बड़े घटनाक्रम ने साबित कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति ने भारत को संकट के दौर में भी एक अजय आर्थिक किला बना दिया है। इजराइली और खाड़ी व्यापार मंडलों ने भारतीय बंदरगाहों और समुद्री मार्गों को सबसे सुरक्षित माना है। इस बीच, अरब सागर और हिंद महासागर में भारतीय नौसेना की आक्रामक गश्त और युद्धपोतों की तैनाती ने दुनिया भर के वाणिज्यिक जहाजों को यह भरोसा दिया है कि केवल भारतीय नौसेना ही अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र को सुरक्षित रख सकती है।
वैश्विक बाजारों में जहाँ क्रूड ऑयल और गैस की आपूर्ति में व्यवधान आ रहा है, वहीं भारत ने अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडारों और दूरदर्शी समझौतों के दम पर अपने घरेलू बाजार को पूरी तरह स्थिर रखा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी स्वीकार किया है कि भारत के बिना वैश्विक आर्थिक तंत्र को ढहने से बचाना असंभव है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह केवल अपनी शर्तों पर व्यापार करेगा और किसी भी देश का दादागिरी वाला रवैया बर्दाश्त नहीं करेगा। यह भारत के बढ़ते वैश्विक आभामंडल का ही परिणाम है कि आज दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्तियां भी भारत के आर्थिक और सैन्य सहयोग के लिए कतार में खड़ी नजर आ रही हैं।



