लाल सागर पर हूती विद्रोहियों का कब्जा: रणनीतिक द्वीप पर जमाया डेरा, जंग का नया मोर्चा खुला!

यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने 12 सितंबर की सुबह लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार पर स्थित एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक द्वीप पर कब्जा जमा लिया है। इसे हूती विद्रोहियों द्वारा पिछले कई वर्षों में की गई सबसे बड़ी और आक्रामक क्षेत्रीय बढ़त माना जा रहा है।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, अब पूरी तरह हूती विद्रोहियों की सीधी जद में आ चुका है। इस कब्जे से अंतरराष्ट्रीय व्यापार जहाजों की सुरक्षा पर बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। अमेरिका और पश्चिमी ताकतों के लिए यह एक सीधी चुनौती है, क्योंकि हूती विद्रोहियों का मुख्य मकसद वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को बाधित करके व्यापारिक दबाव बढ़ाना है। विशेषज्ञों का दावा है कि लाल सागर में इस नए मोर्चे के खुलने से न केवल जहाजों पर हमले बढ़ेंगे बल्कि कमर्शियल शिपिंग का रूट बदलना पड़ेगा, जिससे माल ढुलाई का खर्च और समय दोनों बेतहाशा बढ़ जाएंगे।
यह घटना साबित करती है कि मिडिल ईस्ट की जंग अब सीमित न रहकर अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर खुलेआम डाका डालने और पूरी दुनिया को बंधक बनाने की दिशा में बढ़ चुकी है।
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