पुनर्वासित नक्सलियों को वित्तीय साक्षरता की सीख, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जोड़ने की पहल तेज

छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025 के तहत आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं। इसी क्रम में बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तत्वावधान में पुनर्वास केंद्र में वित्तीय साक्षरता कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 80 पुनर्वासित युवाओं ने भाग लेकर बैंकिंग और वित्तीय प्रबंधन की महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की।
कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों को बैंकिंग सेवाओं, वित्तीय अधिकारों, सुरक्षित निवेश और सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराना था, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें और भविष्य की बेहतर वित्तीय योजना तैयार कर सकें। कार्यक्रम में आरबीआई के सहायक महाप्रबंधक सत्येंद्र राठौर, अग्रणी जिला अधिकारी नवीन तिवारी, अग्रणी जिला प्रबंधक मनीष कुमार कुशरो और कार्तिक राम बाँधेकर ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
विशेषज्ञों ने बैंक खाता संचालन, बचत की आदत, केवाईसी प्रक्रिया, बैंक ऋण, जमाकर्ताओं और ऋणग्राहकों के अधिकार, बैंकिंग लोकपाल, चिटफंड कंपनियों से बचाव, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की जानकारी और साइबर वित्तीय सुरक्षा जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सलाह दी गई कि वे केवल अधिकृत बैंकिंग संस्थानों के माध्यम से ही वित्तीय लेन-देन करें और किसी भी संस्था में निवेश से पहले उसके पंजीकरण की जांच अवश्य करें। साथ ही साइबर ठगी से बचाव के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह की कार्यशालाएं पुनर्वासित युवाओं का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। यह पहल उन्हें समाज की मुख्यधारा से स्थायी रूप से जोड़ने और आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।




