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ताइवान ने खुलकर कहा चीन बड़ा खतरा, क्या अब टकराव की उलटी गिनती शुरू

20 मार्च 2026 को रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार ताइवान के रक्षा मंत्री वेलिंगटन कू ने साफ कहा कि चीन का सैन्य विस्तार लगातार जारी है और वह ताइवान के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रभावी प्रतिरोध जरूरी है ताकि बीजिंग को यह महसूस हो कि ताइवान पर किसी भी हमले की कीमत बहुत ज्यादा होगी और सफलता की संभावना बहुत कम रहेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी खुफिया समुदाय ने 19 मार्च 2026 को कहा था कि चीन फिलहाल 2027 में ताइवान पर आक्रमण की योजना नहीं बना रहा और बिना बल प्रयोग के नियंत्रण चाहता है।

रॉयटर्स के मुताबिक ताइवान ने अमेरिकी आकलन के बाद भी कोई राहत वाला संदेश नहीं दिया। कू ने संसद में पत्रकारों से कहा कि चीन ने न तो बल प्रयोग का विकल्प छोड़ा है और न ही उसने अपने सैन्य खर्च की रफ्तार धीमी की है। उनके अनुसार अगर चीन अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार करता रहा और ताइवान की रक्षा क्षमता उसी अनुपात में मजबूत नहीं हुई, तो हमले की संभावना बढ़ सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बीजिंग ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और हाल के वर्षों में उसने वहां दबाव बढ़ाने के लिए लगातार सैन्य अभ्यास किए हैं। दूसरी ओर ताइवान की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार चीन के संप्रभुता दावे को खारिज करती रही है। यही टकराव इस मुद्दे को दुनिया के सबसे बड़े संभावित फ्लैशप्वाइंट्स में से एक बनाता है।

वेलिंगटन कू का केंद्रीय संदेश यही था कि निरोधक शक्ति सिर्फ हथियारों का सवाल नहीं, बल्कि रणनीतिक गणना का हिस्सा है। उनका कहना था कि चीन को यह विश्वास नहीं होना चाहिए कि हमला आसान या सफल होगा। यही सोच ताइवान की रक्षा नीति का मूल आधार बनती दिख रही है।

20 मार्च 2026 की यह रिपोर्ट दिखाती है कि अमेरिकी आकलन अपेक्षाकृत संतुलित होने के बावजूद ताइवान खुद खतरे को कम करके देखने को तैयार नहीं है। एशिया की यह तनातनी केवल क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, समुद्री मार्गों और महाशक्तियों की प्रतिस्पर्धा से जुड़ा बेहद संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।

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