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सागौन रोपण से किसानों को मिलेगा सुरक्षित निवेश और बेहतर मुनाफा: वन मंत्री

Teak plantation will provide farmers with a secure investment and better profits: Forest Minister

नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में आयोजित “सागौन प्रबंधन एवं उन्नत सागौन रोपण” विषयक एक दिवसीय कार्यशाला में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने किसानों को सागौन खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सागौन केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सुरक्षित और लाभकारी निवेश है, जो किसानों को लंबे समय में बेहतर आर्थिक लाभ दिला सकता है।

कार्यशाला में वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। मंत्री ने बताया कि सागौन विश्व की सबसे मूल्यवान इमारती लकड़ियों में गिना जाता है। इसकी मजबूती, टिकाऊपन और दीमक-रोधी गुणों के कारण इसे लकड़ी का राजा कहा जाता है।
उन्होंने आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि टिश्यू कल्चर से तैयार सागौन पौधे तेजी से बढ़ते हैं और बेहतर गुणवत्ता की लकड़ी उपलब्ध कराते हैं। इससे किसानों की उत्पादकता और आय दोनों में वृद्धि होती है।

किसानों को अतिरिक्त आय के अवसरों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सागौन रोपण के शुरुआती वर्षों में पौधों के बीच खाली स्थान पर दलहन, तिलहन और अन्य फसलें उगाकर अतिरिक्त कमाई की जा सकती है। वहीं 8 से 10 वर्षों बाद वृक्षों की छंटाई से भी आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
राज्य सरकार द्वारा निजी भूमि पर व्यावसायिक वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए विशेष अनुदान दिया जा रहा है। 5 एकड़ तक सागौन रोपण करने वाले छोटे और सीमांत किसानों को 100 प्रतिशत अनुदान के तहत प्रति पौधा 94.50 रुपये की सहायता दी जाती है। वहीं 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में वृक्षारोपण करने वाले किसानों और संस्थाओं को 50 प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

कार्यशाला में कोयम्बटूर से आईं वैज्ञानिक डॉ. रेखा आर. वारियर और डॉ. आर. यशोदा ने किसानों को उन्नत सागौन उत्पादन, मिट्टी चयन, पौध संरक्षण और रोग प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।
विशेषज्ञों के अनुसार छत्तीसगढ़ की जलवायु और मिट्टी सागौन उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है। बीजापुर, भोपालपटनम, कोटा, अंबागढ़ चौकी, रायगढ़, सराईपाली और नारायणपुर जैसे क्षेत्रों में सागौन आधारित कृषि वानिकी किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
कार्यक्रम के अंत में किसानों से बड़े पैमाने पर सागौन रोपण अपनाने की अपील करते हुए कहा गया कि “खेत में सागौन, हर किसान समृद्ध” का संकल्प प्रदेश में हरित विकास और ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा देगा।