रायपुर का वो 21 साल का जांबाज क्रांतिवीर, जिसने घर में गोला-बारूद बनाकर उखाड़ फेंकी थी अंग्रेजों की नींद: पढ़िए ‘रायपुर बम षड्यंत्र’ का इतिहास!

(Fourth Eye News): स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में जब-जब देशभक्ति की जलती हुई मशालों का जिक्र होगा, तब-तब छत्तीसगढ़ के ‘रायपुर बम षड्यंत्र केस’ (1942) का नाम स्वर्ण अक्षरों में चमकता रहेगा। मात्र 21 वर्ष की अल्पायु में मातृभूमि को आज़ाद कराने का ऐसा जुनून कि घर के गुप्त कमरों और जंगलों में बम बनाने का कारखाना खोल दिया! यह अमर कहानी है छत्तीसगढ़ के जांबाज क्रांतिवीर परसराम सोनी और उनके साथियों की।
1942 की क्रांति और गुप्त हथियार निर्माण
1942 में जब ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के तहत पूरा देश उबल रहा था, तब रायपुर के युवाओं के दिल में भी देशभक्ति की ज्वाला भड़क रही थी। युवा परसराम सोनी ने अपने स्वाभिमानी साथियों के साथ मिलकर ब्रिटिश सरकार के दफ्तरों और पुलिस थानों को उड़ाने का गुप्त प्लान बनाया। उन्होंने रसायन शास्त्र का अध्ययन कर स्वयं देसी पिस्तौल, कारतूस और हथगोले बनाने की विधि सीखी और एक गुप्त कार्यशाला स्थापित कर ली।
मुखबरी से टूटी योजना, पर अमर हो गया जज्बा
अंग्रेजी हुकूमत की खुफिया एजेंसियों को जब इस गुप्त विस्फोटक कारखाने की भनक लगी, तो पुलिस के हाथ-पांव फूल गए। एक गद्दार की मुखबरी के कारण परसराम सोनी और उनके देशभक्त साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत में चले मुकदमे को इतिहास में ‘रायपुर कॉनस्पिरेसी केस’ के नाम से जाना गया। भले ही उनका यह मिशन पूरा न हो सका, लेकिन 21 साल के इस नौजवान ने यह साबित कर दिया कि भारत माता के वीरों के सामने ब्रिटिश हुकूमत की कोई हैसियत नहीं थी।



