रेडियो पर गूंजी दीदियों की सफलता की कहानी, ‘दीदी के गोठ’ में वित्तीय सशक्तिकरण की मिसाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत संचालित लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘दीदी के गोठ’ का छठवां एपिसोड गुरुवार को श्रोताओं तक पहुंचा। इस कड़ी में स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं ने वित्तीय समावेशन के जरिए बदली अपनी ज़िंदगी की प्रेरक कहानियां साझा कीं। नव वर्ष के पहले एपिसोड में महिलाओं के आत्मविश्वास, आर्थिक मजबूती और सामूहिक प्रयासों की गूंज सुनाई दी।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि नया साल स्व-सहायता समूहों के लिए नई ऊर्जा और नई संभावनाएं लेकर आए। उन्होंने दीदियों से संगठन को और मजबूत करने, आपसी सहयोग बढ़ाने और सामूहिक तरक्की की राह पर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
इस विशेष एपिसोड में दुर्ग, बालोद और गरियाबंद जिलों की दीदियों ने अपने अनुभव साझा किए। बालोद जिले के गुंडरदेही विकासखंड के ग्राम गब्दी की जय संतोषी स्व-सहायता समूह की खिलेश्वरी देवांगन ने बताया कि कैसे ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया और सफलता की नई कहानी लिखी।
गरियाबंद जिले के मैनपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम धुरवागुड़ी की बीसी सखी खेमेश्वरी तिवारी ने कोरोना काल के दौरान घर-घर बैंकिंग सेवा पहुंचाने का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे जरूरतमंदों तक समय पर पैसा पहुंचाकर वे समाज की सेवा के साथ-साथ खुद भी आर्थिक रूप से सशक्त बनीं और आज गृहस्थी के साथ समाज परिवर्तन की जिम्मेदारी निभा रही हैं।
वहीं दुर्ग जिले के धमधा जनपद पंचायत के ग्राम चीचा की जय सतनाम स्व-सहायता समूह की बीमा सखी कल्पना चतुर्वेदी ने वित्तीय साक्षरता, बैंकिंग, बीमा और डिजिटल लेन-देन पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि ‘बिहान’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मसम्मान, स्थायित्व और आत्मनिर्भरता की यात्रा है।
एपिसोड में नियमित बचत, ऋण, बीमा और डिजिटल लेन-देन जैसी सेवाओं के जरिए ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आ रहे सकारात्मक बदलाव और इससे सशक्त होती राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा की गई। यह छठवां एपिसोड हिंदी, छत्तीसगढ़ी, गोंडी और सदरी भाषाओं में प्रसारित किया गया।




