उदयपुर में यह शिवालय, आस्था और शिल्प का बेजोड़ नमूना है नीलकंठेश्वर मंदिर


गंज बासौदा// तहसील मुख्यालय से 16 किलोमीटर उदयपुर में स्थित नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर में रोज सूर्य की किरणों का अभिषेक होता है। सूरज की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिवलिंग पर पड़ती है। मंदिर का वास्तु कुछ इस प्रकार का है कि भोर की पहली किरण वेधशाला, मंडप और गर्भगृह के छोटे से द्वार को चीरती हुई भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर पड़ती है। जैसे सूर्यदेव उदय के साथ ही भोलेनाथ को प्रणाम कर जग में उजियारा फैलाने की इजाजत मांगते हों। मुख्य शिवलिंग पर पीतल का आवरण चढ़ाया गया है। जिसे विशेष मौकों पर जल अर्पित करने और दर्शन के लिए अलग भी रख दिया जाता है। मंदिर मेंं शिवलिंग के पास ही देवी पार्वती की प्रतिमा भी मौजूद है।

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11वीं शताब्दी में बना था मंदिर
परमार राजा भोज के पुत्र उदयादित्य द्वारा 10-11 वीं शताब्दी में बनवाया गया उदयपुर का नीलकंठेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर आस्था और शिल्प का बेजोड़ नमूना है। गगनचुम्बी शिखर, नायाब शिल्प और गर्भगृह में विशाल शिवलिंग के दर्शन करने यहां श्रावण सोमवार पर लाखों दर्शनार्थी पहुंचते हैं। **
मुख्य मंडपों से सजा है नीलकंठेस्बर मंदिर
भगवान शिव का यह मंदिर विख्यात है। राजा उदयादित्य द्वारा बनवाए जाने से मंदिर को उदयेश्वर महादेव के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर के प्रांगण में एक वेधशाला भी है। परमारोंं की राजधानी धार से दूर उदयपुर में निर्मित यह मंदिर उनकी सुदूर राज्य की सीमाओं को भी दशातज़ है। मंदिर के शिखर समकालीन चंदेल राजाओं द्वारा निर्मित खजुराहो मंदिर से समानता रखते हैं। नीलकंठेश्वर मंदिर में मंडप के साथ ही प्रवेश के लिए तीन ओर मुख मंडप हैं।


देखते बनती है पत्थरों की कला
गर्भगृह के दोनों ओर गंगा-यमुना मानव रूप में उत्कीर्ण दिखाई देती हैं। जो मंदिर में प्रवेश से पूर्व आत्मिक शुद्धता की ओर संकेत करती है। मंदिर के चारों ओर दिक्पाल, देवी देवताओं की प्रतिमाओं का अंकन है। दुर्गा प्रतिमाएं, गणेश प्रतिमाएं, ब्रह्मा और विष्णु की प्रतिमाएं भी यहां शोभायमान हैं। शिव के गणों की प्रतिमाएं भी प्रवेश द्वार पर मौजूद हैं। जगह-जगह घुंघराले बाल, उभरी हुई आंखें और बड़े पेट वाले भारवाही यक्ष अपने कंधों पर सारा भार उठाए स्तंभों पर नजर आते हैं। ***** कैसे पहुंचें:
बाय एयर
विदिशा मध्य प्रदेश के मध्य में स्थित है और यह राजधानी भोपाल के बहुत पास है, विदिशा सड़क और रेल संपर्क से दोनों ओर से जाने योग्य है। भोपाल (65 किलोमीटर) निकटतम हवाई अड्डा है, जो दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और उदयपुर से जुड़ा हुआ है। टैक्सी-सवारी में विदिशा से भोपाल पहुंचने में लगभग 1-2 घंटे लगते हैं।

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ट्रेन द्वारा
विदिशा रेलवे स्टेशन मुख्य रेलवे ट्रैक दिल्ली से मुंबई और दिल्ली से हैदराबाद पर स्थित है। अप और डाउन ट्रेन विदिशा से गुजरती है । उदयपुर मंदिर बसोदा ब्लाक के ग्राम उदयपुर मै स्थित है I बसोदा ब्लाक रेल मार्ग पर है और बसोदा से उडिया पुर की दूरी २५ किलो मीटर हैI

सड़क के द्वारा
भोपाल-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग -146 सांची-विदिशा-सागर से गुजरता है I विदिशा से भोपाल की दूरी 60 किलो मीटर है I राज्य उच्च मार्ग 19 विदिशा से अशोक नगर जाता है I

सुरेंद्र पस्तोर

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