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Hormuz पर फिर बढ़ा खतरा! जहाजों की आवाजाही गिरी, दुनिया की तेल सप्लाई पर मंडराया संकट

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक Strait of Hormuz पर अब सिर्फ युद्ध का खतरा नहीं है, बल्कि व्यापारिक आवाजाही का वास्तविक संकट दिखाई देने लगा है। मंगलवार को इस समुद्री मार्ग से केवल आठ जहाजों के गुजरने की जानकारी सामने आई। Reuters के मुताबिक यह आंकड़ा पिछले एक सप्ताह का सबसे निचला स्तर है। सामान्य परिस्थितियों में यहां रोजाना करीब 130 से 140 जहाजों की आवाजाही होती थी।

यह अंतर अपने आप में बताता है कि संकट कितना गहरा है।

आखिर Hormuz में हो क्या रहा है?

Iran ने Strait of Hormuz को पूरी तरह सामान्य रूप से खोलने से इनकार किया हुआ है। दूसरी तरफ अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ तनाव बना हुआ है। इसी बीच Gulf और आसपास के समुद्री इलाकों में जहाजों पर हमलों की खबरों ने shipping कंपनियों के जोखिम को बढ़ा दिया है।

Reuters की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को Hormuz से सिर्फ आठ जहाजों को ट्रैक किया गया। इनमें केवल एक coal carrier बाहर निकला, जबकि सात जहाज Iranian waters के रास्ते अंदर जा रहे थे।

यह सिर्फ एक समुद्री मार्ग की समस्या नहीं है। Hormuz वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था का बेहद महत्वपूर्ण chokepoint है।

सबसे बड़ा सवाल—तेल का क्या होगा?

Hormuz में व्यवधान का सबसे सीधा असर crude oil और LNG की supply पर पड़ सकता है। समुद्री यातायात जितना घटेगा, transport cost, insurance risk और supply uncertainty उतनी ही बढ़ेगी।

Reuters ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में इस route पर प्रतिदिन 130-140 जहाज तक गुजरते थे। अब यह संख्या बेहद नीचे आ गई है।

यानी बाजार के सामने सवाल केवल यह नहीं है कि आज कितना तेल उपलब्ध है, बल्कि यह है कि कल supply कितनी भरोसेमंद रहेगी।

क्या दुनिया के पास दूसरा रास्ता है?

कुछ हद तक। Reuters के अनुसार Bab el-Mandeb Strait से मंगलवार को करीब 30 transits दर्ज हुए, जो वहां के 10-दिन के औसत से अधिक हैं। इसका संकेत है कि कुछ shipping traffic Hormuz से बचकर दूसरे रास्तों की ओर जा रहा है।

लेकिन वैकल्पिक रास्ता हमेशा सस्ता या तेज नहीं होता।

यही कारण है कि shipping कंपनियों के लिए युद्ध-जोखिम, fuel cost, insurance premium और यात्रा की अवधि सभी बढ़ सकते हैं।

Iran-US बातचीत क्यों महत्वपूर्ण है?

इस पूरे संकट का राजनीतिक केंद्र Iran और अमेरिका के बीच बातचीत है।

Iran की स्थिति यह है कि Hormuz की सामान्य आवाजाही को बहाल करने के लिए उसे अमेरिकी concessions चाहिए। दूसरी तरफ Washington चाहता है कि maritime route खुला रहे और commercial shipping बाधित न हो।

इससे एक खतरनाक स्थिति बन रही है—समुद्री मार्ग अब सिर्फ व्यापार का रास्ता नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव का हथियार बनता दिखाई दे रहा है।

भारत पर क्या असर?

भारत के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर imported crude पर निर्भर है।

अगर Hormuz लंबे समय तक बाधित रहता है तो संभावित प्रभावों में:

  • crude oil import cost बढ़ना,
  • petrol-diesel की कीमतों पर दबाव,
  • LPG और petrochemical लागत बढ़ना,
  • shipping insurance महंगा होना,
  • inflation पर असर,
  • रुपये पर दबाव,
  • aviation और transport cost बढ़ना

शामिल हो सकते हैं।

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