हार के मुंह से टीम इंडिया को जीत तक ले गए तिलक वर्मा, आखिरी ओवरों में दिखाया दम

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क्राइस्टचर्च में शनिवार (24 अक्टूबर) को खेले गए मुकाबले में भारत ने मेजबान न्यूजीलैंड को 4 विकेट से शिकस्त दी। 180 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम एक समय मुश्किल में नजर आ रही थी, लेकिन तिलक वर्मा ने आखिरी ओवरों में ऐसा बल्ला चलाया कि न्यूजीलैंड के गेंदबाज देखते रह गए।

तिलक ने महज 26 गेंदों में 6 चौके और 1 छक्के की मदद से नाबाद 51 रन बनाए। उनकी इस विस्फोटक पारी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

मैच का रोमांच उस समय चरम पर पहुंच गया, जब भारत को आखिरी तीन ओवर में जीत के लिए 46 रन बनाने थे और टीम के छह विकेट गिर चुके थे। तिलक वर्मा 13 गेंदों में 17 रन बनाकर खेल रहे थे, जबकि नितीश रेड्डी 9 गेंदों में 16 रन पर थे। ऐसे दबाव भरे हालात में तिलक ने गियर बदला और चौके-छक्कों की बरसात करते हुए भारत को एक गेंद शेष रहते जीत दिला दी।
कोच की सलाह को बनाया जीत का मंत्र
मैच के बाद तिलक वर्मा ने अपनी शानदार पारी के पीछे की रणनीति का खुलासा किया। पोस्ट मैच प्रेजेंटेशन में उन्होंने बताया कि मुकाबले से पहले उनकी कोच गौतम गंभीर और सितांशु कोटक से बातचीत हुई थी।

तिलक के मुताबिक, दोनों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि अगर वह अंत तक क्रीज पर टिके रहते हैं, तो भारत को जीत दिला सकते हैं। तिलक ने बताया कि मुश्किल परिस्थिति में भी उनके दिमाग में यही बात चल रही थी कि उन्हें आखिरी तक खेलना है और टीम को जीत तक पहुंचाना है।

उन्होंने कहा कि वह मैच को जितना संभव हो सके अंत तक ले जाना चाहते थे। आखिरकार टीम का भरोसा सही साबित हुआ और भारत ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस प्रदर्शन पर तिलक ने खुद पर गर्व भी जताया।
नमन धीर के साथ बनाई जीत की पटकथा
तिलक ने नमन धीर के साथ हुई साझेदारी को भी जीत का अहम हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच लगातार यही बातचीत हो रही थी कि उन्हें अंत तक टिके रहना है।

तिलक के अनुसार, पिछली बार के मुकाबले इस बार विकेट थोड़ा धीमा था। ऐसे में स्पिन गेंदबाजों के सामने तेजी से रन दौड़कर लेने की रणनीति बनाई गई थी। दोनों बल्लेबाजों ने इसी योजना पर अमल किया।

हालांकि मिचेल सैंटनर के आखिरी ओवर में नमन धीर का विकेट गिर गया, लेकिन तिलक का मानना था कि अगर नमन अंत तक टिके रहते तो भारत 18वें ओवर में ही मुकाबला खत्म कर सकता था।

तिलक ने नमन की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए जीत का श्रेय उन्हें भी दिया। साथ ही नितीश रेड्डी के साथ मिलकर हैदराबाद के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर खुशी जाहिर की।

इस मुकाबले में तिलक वर्मा ने साबित कर दिया कि दबाव कितना भी बड़ा क्यों न हो, अगर बल्लेबाज का आत्मविश्वास मजबूत हो तो आखिरी गेंद से पहले भी जीत की कहानी लिखी जा सकती है।

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