केंद्र सरकार द्वारा भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले पर पूर्वोत्तर राज्यों में भारी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (SDF) और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने राज्यपाल भवन का घेराव करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से इस नियुक्ति को तुरंत रद्द करने की मांग की है। विरोध कर रहे दलों का सीधा आरोप है कि दुष्यंत गौतम का नाम उत्तराखंड के चर्चित ‘अंकिता भंडारी हत्याकांड’ की चल रही सीबीआई जांच की परिधि और विवादों से जुड़ा हुआ है। ऐसे में एक संवेदनशील सीमावर्ती राज्य के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर उनकी नियुक्ति अत्यंत चिंताजनक और संवैधानिक मर्यादाओं का हनन है।
विपक्ष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों के साये में घिरे नेताओं को राज्यपाल बनाकर उन्हें संवैधानिक संरक्षण प्रदान करने का काम कर रही है। सिक्किम की क्षेत्रीय पार्टियों ने चेतावनी दी है कि यदि दुष्यंत गौतम की नियुक्ति वापस नहीं ली गई तो पूरे राज्य में अभूतपूर्व आंदोलन खड़ा किया जाएगा। एक तरफ जहां सरकार इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, वहीं जनता के मन में यह सवाल गहरा रहा है कि आखिर दागी और विवादित चेहरों को ही राजभवनों की शाही मेहमानी क्यों सौंपी जा रही है?
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