खत लिखकर बताएं गणेशजी को समस्या, हो जाएगा समाधान

शास्त्रों में श्रीगणेश को प्रथम पूज्यनीय कहा गया है। और किसी भी काम को करने से पहले गजानन भगवान की आराधना की जाती है। इसलिए देश-दुनिया में कई जगहों पर गणपति भगवान विभिन्न स्वरूपों में विद्यमान हैं। ऐसे ही विघ्नविनाशक गणेश की प्रतिमा सवाई माधौपुर के रणथंभौर किले में विराजमान है, जो मात्र पत्र के माध्यम से भक्तों की समस्या दूर कर देते हैं।

त्रिनेत्री गणेश के चरणों मे हमेशा चिट्ठियों का ढेर लगा रहता है और पुजारी भक्तों की समस्या श्रीगणेश को पढ़कर सुनाते रहते हैं। भक्तों का विश्वास है कि त्रिनेत्री गणेश के दरबार में मात्र पत्रों के भेजने से ही समस्या का समाधान हो जाता है। दुनियाभर से रोजाना बड़ी संख्या में खत त्रिनेत्री गणेश के पास आते हैं, जिनमें लोग अपनी समस्या का वर्णन करते हैं। मान्यता है कि भक्तों की समस्या को सुनने के बाद श्रीगणेश उनकी समस्याओं का समाधान कर देते हैं।

मंदिर का इतिहास

त्रिनेत्री गणेश का प्राचीन मंदिर सवाई माधौपुर से लगभग 10 किमी. दूर रणथंभौर के किले में बना हुआ है। मंदिर की स्थापना 700 साल पहले हुई थी। सन 1299 में महाराजा हम्मीरदेव चौहान व दिल्ली शासक अलाउद्दीन खिलजी का युद्ध हुआ था। अलाउद्दीन खिलजी ने रणथम्भौर के दुर्ग को 9 महीने तक घेरे रखा था। किले में जब रसद सामग्री खत्म होने लगी तो महाराजा हम्मीरदेव को गणेश जी ने सपने मे कहा कि तुंम मेरी पूजा करो मैं तुम्हे चिंतामुक्त कर दूंगा। भगवान गणेश के आदेशानुसार महाराज ने गणेशजी की स्थापना की और संकटों से निजात पाया।

तीसरे नेत्र की मान्यता

मंदिर में भगवान गणेश की त्रिनेत्रधारी मूर्ति है। मान्यता है कि भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र पुत्र गणेश को सौंपा था। मंदिर में देव गजानन के साथ पत्नी रिद्धि, सिद्धि पुत्र शुभ-लाभ के साथ विराजमान हैं।

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