जनजातीय विरासत से विकास की राह: गोड़लवाही में शहीदों को नमन, शिक्षा-सड़क-आवास को नई गति

रायपुर। छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपरा केवल इतिहास नहीं, बल्कि साहस, बलिदान और प्रकृति-संग जीवन की जीवंत प्रेरणा है। यही विरासत समाज को आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने और अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने की सीख देती है। यह बात राजनांदगांव जिले के गोड़लवाही में अखिल भारतीय हल्बा-हल्बी महासभा द्वारा आयोजित बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कही।
कार्यक्रम के दौरान शहीद शिरोमणि गैंदसिंह नायक की प्रतिमा का अनावरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह और सांसद संतोष पाण्डेय विशेष रूप से उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने 1.21 करोड़ रुपये से बने हायर सेकेंडरी स्कूल भवन और 1.52 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 50 सीटर प्री-मैट्रिक छात्रावास का लोकार्पण किया। साथ ही गोड़लवाही-उमरवाही-करमरी सड़क चौड़ीकरण, नए महाविद्यालय की स्थापना, स्कूल परिसर में बाउंड्रीवाल और अटल समरसता भवन निर्माण की घोषणा की। स्वामित्व योजना के तहत अधिकार पत्र और उज्ज्वला योजना के अंतर्गत महिलाओं को गैस कनेक्शन वितरित किए गए।
उन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की रफ्तार बढ़ने की बात कहते हुए कहा कि नक्सलवाद अब अंतिम चरण में है और 2026 तक इसके पूर्ण खात्मे के लक्ष्य पर तेजी से काम हो रहा है। नियद नेल्ला नार योजना से सैकड़ों गांव शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने जनजातीय नायकों को समर्पित डिजिटल संग्रहालय का उल्लेख करते हुए रायपुर आकर इसके अवलोकन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के उत्थान के लिए योजनाओं के माध्यम से महिलाओं, वनोपज संग्राहकों और बुजुर्गों को सीधा लाभ पहुंचाया जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने शहीद गैंदसिंह को शोषण के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक बताया, वहीं सांसद संतोष पाण्डेय ने स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज के योगदान को रेखांकित किया। कार्यक्रम में सामाजिक प्रतिनिधियों, पंचायत पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों की सहभागिता रही।




