वनोपज से बदलेगी बीजापुर की तस्वीर, महिलाएं बनेंगी ‘लखपति दीदी’

बीजापुर जिले में वनोपज संग्रहण और उसके मूल्यवर्धन के जरिए स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और बेहतर आय के नए रास्ते खुलते नजर आ रहे हैं। इसी दिशा में जिले में कार्यरत 16 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) के पदाधिकारियों और वनोपज व्यापारियों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें महिलाओं की आजीविका बढ़ाने पर गहन मंथन हुआ।
बैठक में इमली को एक प्रभावी आजीविका साधन के रूप में विकसित करने पर खास फोकस रहा। महिलाओं को कच्ची इमली बेचने तक सीमित न रहकर उसकी ग्रेडिंग, बीज अलग करने और प्रसंस्करण के जरिए अधिक मुनाफा कमाने के लिए प्रेरित किया गया। इमली के गूदे से चपाती जैसे उत्पाद तैयार कर आय को कई गुना बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।
बताया गया कि जिले के कई गांवों में महिला समूह स्थानीय स्तर पर इमली का संग्रहण, प्रसंस्करण और पैकेजिंग कर सकते हैं। इससे वनोपज का सही मूल्य मिलने के साथ-साथ महिलाओं को अपने घर के पास ही स्थायी रोजगार उपलब्ध होगा।
व्यापारियों ने जानकारी दी कि वनोपज का वैल्यू एडिशन करने से कच्चे उत्पाद की तुलना में दो से चार गुना अधिक दाम मिल सकता है। इमली के अलावा महुआ, टोरा, चिरौंजी और आंवला जैसे बहुमूल्य वनोपज के संग्रहण और प्रसंस्करण की संभावनाओं की भी समीक्षा की गई।
महिला समूहों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा गया कि नई तकनीक सीखकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं और बस्तर के बहुमूल्य वनोपज का वाजिब लाभ सीधे संग्राहकों तक पहुंचाया जा सकता है।




