मध्य पूर्व युद्ध ने दुनिया की धड़कन बढ़ाई, सेंट्रल बैंकों ने महंगाई पर बजाया अलार्म

20 मार्च 2026 की रॉयटर्स रिपोर्ट के मुताबिक मध्य पूर्व में जारी युद्ध ने केवल तेल बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक बॉन्ड, ब्याज दर और निवेशकों की उम्मीदों को भी झकझोर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया कि शुक्रवार को तेल की कीमतों में कुछ कमी आई, लेकिन केंद्रीय बैंकों की सख्त चेतावनियों ने यह साफ कर दिया कि महंगाई का खतरा अभी टला नहीं है। बाजार इस नतीजे पर पहुंचते दिखे कि अब पहले जैसी नरम मौद्रिक नीति की उम्मीद करना मुश्किल होगा।
रॉयटर्स के अनुसार जी7 देशों और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में हुई हालिया मौद्रिक नीति बैठकों का सबसे बड़ा संकेत यह रहा कि नीति निर्माता अब ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रेडर्स अब 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व से ब्याज दर कटौती की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। बैंक ऑफ इंग्लैंड की अगली बैठक में दर बढ़ोतरी की संभावना लगभग बराबरी की मानी जा रही है। वहीं रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि यूरोपीय सेंट्रल बैंक अप्रैल में दर बढ़ोतरी पर चर्चा शुरू कर सकता है और जून में सख्ती की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
रिपोर्ट में मिजुहो के एशिया एक्स जापान मैक्रो रिसर्च प्रमुख विष्णु वराथन का बयान भी शामिल है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंकों का संदेश बाजारों के लिए अहम संकेत है कि वे हालात पर नजर रखे हुए हैं और बढ़ती यील्ड अपने आप में सख्ती का काम कर रही है। इससे पहले गुरुवार को वैश्विक बॉन्ड बाजार में तेज बिकवाली देखी गई थी, जिसके चलते यील्ड कई महीनों के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई।
रॉयटर्स की रिपोर्ट यह भी बताती है कि जापान में अवकाश के कारण शुक्रवार को अमेरिकी ट्रेजरी कैश ट्रेडिंग बंद रही, लेकिन फ्यूचर्स में मामूली बढ़त दर्ज हुई। इस पूरी तस्वीर का मतलब यह है कि तेल के झटके ने केवल कमोडिटी नहीं, बल्कि ब्याज दर, मुद्रास्फीति और वैश्विक पूंजी की दिशा तक बदल दी है।
20 मार्च 2026 की यह रिपोर्ट बताती है कि युद्ध का सबसे बड़ा असर कभी-कभी मोर्चे पर नहीं, बल्कि बाजार, उधार की लागत, महंगाई और नीति निर्माताओं की भाषा में दिखाई देता है। दुनिया फिलहाल सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि महंगे पैसे के नए दौर की आशंका भी झेल रही है।




