ईंट-गारे में उतरा सुशासन: पंचायत भवन निर्माण में श्रमिकों संग जुड़कर दिखाया जमीनी नेतृत्व

रायपुर। निर्माणाधीन पंचायत भवन के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने औपचारिकता से आगे बढ़कर ज़मीनी हकीकत को खुद महसूस किया। उन्होंने केवल समीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उस प्रक्रिया का हिस्सा बने जो सीधे आमजन के जीवन से जुड़ी है। उनका यह व्यवहार साफ संदेश देता है कि सुशासन केवल कागज़ी योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर उसे जीने की प्रक्रिया है।
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में काम कर रहीं श्रमिक महिलाओं के बीच पहुंचकर खुद ईंट जोड़ाई में हाथ बँटाया। इस दौरान श्रमिक बहन संगीता ने मुस्कुराते हुए उनसे कहा, “ईंट जोड़ाई अच्छे से करिए, मसाला बढ़िया से डालिए।” यह साधारण सा संवाद नहीं, बल्कि सरकार और जनता के बीच बढ़ते विश्वास और अपनत्व का प्रतीक बन गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का असली मतलब केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जनता के साथ मिलकर धरातल पर उतारना है। जब शासन और जनता के बीच संवाद, विश्वास और सहभागिता होती है, तभी विकास स्थायी और प्रभावी बनता है।
इस मौके पर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, काम तय समयसीमा में पूरा किया जाए और श्रमिकों को पेयजल, सुरक्षा व अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
सुशासन तिहार ने एक बार फिर यह साबित किया कि प्रदेश में शासन अब केवल प्रशासनिक ढांचा नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, साझेदारी और विश्वास पर आधारित एक जीवंत व्यवस्था बन चुका है।




