मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना बनी गरीब परिवारों का सहारा, 24 हजार से अधिक बेटियों को मिला सम्मान के साथ नया जीवन

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना सामाजिक बदलाव की एक मजबूत मिसाल बनकर सामने आई है। जब भी प्रदेश में सामूहिक विवाह समारोह आयोजित होते हैं, वे केवल दो लोगों के मिलन का अवसर नहीं होते, बल्कि समानता, सम्मान और संवेदनशील शासन की झलक भी पेश करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में यह योजना हजारों जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत और खुशियों का माध्यम बनी है।
गरीब परिवारों के लिए बेटियों का विवाह अक्सर आर्थिक चिंता का कारण बनता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत पात्र परिवारों की 18 वर्ष से अधिक आयु की अधिकतम दो बेटियों को विवाह के लिए 50 हजार रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसमें 35 हजार रुपये बैंक ड्राफ्ट के रूप में, जबकि श्रृंगार सामग्री, उपहार और आयोजन की अन्य सुविधाएं भी शामिल रहती हैं।
इस योजना का उद्देश्य सिर्फ आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि दहेज जैसी कुरीतियों को रोकना और सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देना है। विधवा, अनाथ और निराश्रित कन्याओं को भी योजना में शामिल किया गया है, जिससे यह सामाजिक सुरक्षा का प्रभावी माध्यम बन गई है।
अब तक प्रदेश में 24 हजार से अधिक बेटियों का विवाह इस योजना के तहत संपन्न कराया जा चुका है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में 3200 विवाहों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 1732 जोड़े पहले ही वैवाहिक जीवन की शुरुआत कर चुके हैं।
10 फरवरी 2026 को आयोजित वृहद सामूहिक विवाह समारोह में 6412 जोड़ों का विवाह कराया गया, जिसके लिए छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। यह उपलब्धि इस योजना की व्यापक सफलता और सामाजिक प्रभाव को दर्शाती है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की देखरेख में आयोजित इन समारोहों में भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, सुरक्षा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना आज बेटियों के सम्मान, परिवारों के आत्मविश्वास और सुशासन के मानवीय स्वरूप का प्रतीक बन चुकी है।




