कमजोर मानसून ने बढ़ाई चिंता, खेती और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

भारत में 2026 का मानसून अपेक्षा से कमजोर रहने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे किसानों, अर्थशास्त्रियों और सरकार की चिंता बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अल नीनो की स्थिति के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है।
कम बारिश का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है क्योंकि भारत की बड़ी आबादी आज भी खेती पर निर्भर है। यदि लंबे समय तक बारिश की कमी बनी रहती है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की संभावना बढ़ सकती है।
जलाशयों में पानी की कमी, पेयजल संकट और बिजली उत्पादन पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है। हालांकि सरकार और संबंधित एजेंसियां जल प्रबंधन और खाद्यान्न भंडारण की तैयारियों पर काम कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्षों में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और बेहतर कृषि तकनीकों के कारण स्थिति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। फिर भी मानसून की आगामी प्रगति पर सभी की नजर बनी हुई है।
भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका होने के कारण मानसून की स्थिति बाजार, महंगाई और ग्रामीण आय को सीधे प्रभावित करती है।



