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बस्तर में जमीन रिकॉर्ड सुधार का बड़ा अभियान: 8 हजार से ज्यादा परिवारों को मिला हक, घर पहुंचकर प्रशासन ने सुलझाई वर्षों पुरानी समस्या

बस्तर जिले में वर्षों से लंबित फौती नामांतरण के मामलों को निपटाने के लिए चलाए गए विशेष अभियान ने हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है। जिन परिवारों के मुखिया की मृत्यु के बाद भी जमीन के सरकारी दस्तावेजों में उनका नाम दर्ज था, अब उनके वास्तविक वारिसों के नाम रिकॉर्ड में दर्ज किए जा रहे हैं। इससे लोगों को जमीन संबंधी कामों, बैंकिंग सुविधाओं और शासकीय योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।

इस अभियान के तहत प्रशासन ने गांव-गांव पहुंचकर बीते चार वर्षों के मृत्यु संबंधी रिकॉर्ड की जांच की। ग्राम सचिवों ने मृत व्यक्तियों की सूची तैयार की, जबकि पटवारियों और कोटवारों ने जमीन रिकॉर्ड, वारिसों की जानकारी और दस्तावेजों का सत्यापन किया। जिन परिवारों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं थे, उनके प्रमाण पत्र बनवाकर नामांतरण की प्रक्रिया पूरी की गई।

बस्तर जिले के 611 गांवों में चलाए गए इस विशेष अभियान में 17,405 मृत व्यक्तियों की जानकारी सामने आई। इनमें 8,651 ऐसे मामले मिले जिनमें फौती नामांतरण आवश्यक था। प्रशासन की सक्रिय पहल से अब तक 8,241 मामलों का सफल निराकरण किया जा चुका है, जबकि शेष 410 मामलों पर कार्य जारी है।

यह अभियान तोकापाल, करपावंड, बस्तर, बास्तानार, बकावंड, भानपुरी, नानगुर, जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और दरभा सहित दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में चलाया गया। जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और बकावंड क्षेत्रों में सबसे बेहतर प्रगति दर्ज की गई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। फौती नामांतरण अभियान इसी सोच का हिस्सा है, जिसके माध्यम से लोगों को समय पर उनका अधिकार दिलाने और जमीन संबंधी परेशानियों को दूर करने का प्रयास किया गया है।

बस्तर कलेक्टर के अनुसार, दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को पहले जमीन के रिकॉर्ड सुधारने के लिए लंबे समय तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस बार प्रशासन खुद गांवों तक पहुंचा और समयबद्ध तरीके से पूरी प्रक्रिया पूरी की, जिससे ग्रामीणों का विश्वास प्रशासन पर और मजबूत हुआ है।

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