छत्तीसगढ़ न्यूज़ | Fourth Eye News

गड़े खजाने की हवस में 21 इंसानों की बलि का ब्लूप्रिंट, 8 मौतें होने पर भी बकरे-सूअर काटते रहे बेबस लोग”

बलौदाबाजार: 21वीं सदी के आधुनिक भारत में अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की एक ऐसी खौफनाक दास्तान सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले का खर्वे गांव इस वक्त एक कथित ‘गड़े धन’ को पाने की सनकी हवस और तांत्रिक क्रियाओं के खूनी दलदल में धंस चुका है। पाखंड और अंधविश्वास का आलम यह है कि जमीन के नीचे छिपे खजाने को निकालने के लालच में यहाँ कुल 21 लोगों की नरबलि देने की रोंगटे खड़े कर देने वाली साजिश रची गई। इस खूनी खेल में अब तक 8 मासूम लोगों की संदिग्ध परिस्थितियों में जान जा चुकी है, लेकिन पूरा इलाका विज्ञान और कानून पर भरोसा करने के बजाय हफ्तों तक अंधविश्वास के आगे घुटने टेके बैठा रहा।

इस पूरे मामले में लोगों की अज्ञानता और लाचारी की पराकाष्ठा तब देखने को मिली, जब गांव में लगातार चार रहस्यमयी मौतें हो गईं। मरने वालों के सही इलाज या पुलिस को तुरंत सूचना देने के बजाय लोगों ने अंधविश्वास के ठेकेदारों को बुलाकर गांव में ‘शांति पूजा’ शुरू करवा दी। इस ढोंग के नाम पर बेजुबान 3 बकरों, 1 सुअर और कई मुर्गों की बेरहमी से बलि चढ़ा दी गई, मानो खून बहाने से मौत का यह खौफनाक तांडव थम जाएगा। हद तो तब हो गई जब इस पाखंडी अनुष्ठान को कराने वाले मुख्य तांत्रिक (बैगा) की खुद भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

इलाके से मिल रही जमीनी जानकारियों के मुताबिक, इस वक्त हर तरफ सन्नाटा और दहशत का माहौल पसरा हुआ है। लोगों का सीधा आरोप है कि एक स्थानीय रसूखदार तंत्र-मंत्र के सहारे रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में लोगों को अपने जाल में फंसा रहा था और उन्हें जहरीला पदार्थ मिली शराब परोस रहा था, जिससे शराब पीने के कुछ ही मिनटों के भीतर लोगों की तड़प-तड़प कर मौत हो जाती थी। जब पानी सिर से ऊपर चला गया, तब जाकर प्रशासन जागा और पुलिस व फॉरेंसिक (FSL) की टीम ने 7 शवों को कब्र खोदकर बाहर निकाला ताकि रायपुर की लैब में मौतों के असली वैज्ञानिक कारणों का पता लगाया जा सके। यह घटना चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि जब तक समाज से अंधविश्वास का यह कीड़ा साफ नहीं होगा, तब तक पाखंडी तांत्रिक और खजाने की हवस मासूमों की जान लेती रहेगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button