वैश्विक मंदी की आहट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘मास्टरस्ट्रोक’! खाड़ी संकट के बावजूद भारत का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड स्तर पर, कच्चे तेल का संकट बेअसर!

जब भी मिडिल ईस्ट में युद्ध के नगाड़े बजते हैं, दुनिया भर के बाजारों में हाहाकार मच जाता है। लेकिन पिछले 24 घंटों के आर्थिक आंकड़े गवाह हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय अर्थव्यवस्था एक अभेद्य किले में तब्दील हो चुकी है। खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद ट्रम्प के कड़े रुख और बातचीत की संभावनाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में $4 प्रति बैरल की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो सीधे तौर पर भारत के पक्ष में गई है। भारतीय रिफाइनरियों ने पहले ही रूस और अन्य गैर-खाड़ी देशों से भारी मात्रा में सस्ते कच्चे तेल का स्टॉक जमा कर लिया है, जिससे देश के भीतर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई आंच नहीं आने वाली।
भारतीय बाजारों और रणनीतिक विश्लेषकों ने पुष्टि की है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) अब तक के सबसे सुरक्षित और उच्चतम स्तर पर है। जहां एक ओर अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव हो रहा है और खाड़ी के देशों की मुद्राएं दबाव में हैं, वहीं भारतीय रुपया अपनी मजबूती बनाए हुए है। संभावना यह है कि यदि खाड़ी में तनाव लंबा भी खिंचता है, तो भी भारत की विकास दर (GDP Growth) पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उल्टा, वैश्विक निवेशक चीन और पश्चिम एशिया से अपना पैसा निकालकर भारत के सुरक्षित बाजारों में लगा रहे हैं, जिससे भारत आने वाले दिनों में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।




