ट्रम्प की महाधमकी के आगे तेहरान पस्त! होर्मुज में बारूद बिछाने चला ईरान अब ‘सरेंडर’ और ‘समझौते’ के बीच चुनने को मजबूर!

पिछले 24 घंटों में पश्चिम एशिया का पारा उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए सीधे सरेंडर करने या पूरी तरह तबाह होने का अल्टीमेटम दे दिया। जमीनी हकीकत यह है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी चेतावनी की धज्जियां उड़ाते हुए दो और तेल टैंकरों पर कब्ज़ा कर लिया था, जिससे पूरा समुद्री व्यापार ठप होने की कगार पर पहुंच गया था। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खाड़ी क्षेत्र में कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर ऐसी घातक सैन्य नाकेबंदी की कि ईरान के हौसले पस्त हो गए।
ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान और खाड़ी के देशों की तरफ से समझौते के गुप्त प्रस्ताव मिलने के बाद उन्होंने फिलहाल तेहरान पर होने वाले बड़े हवाई हमलों को टाल दिया है। हालांकि, ईरान के सांसद इब्राहिम रेजाई ने गीदड़भभकी दी है कि यदि अमेरिकी मिसाइलें गिरीं, तो वे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को शमशान बना देंगे। लेकिन पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है कि तेल की कीमतों में $4 प्रति बैरल की भारी गिरावट आई है, जो इस बात का अकाट्य सबूत है कि बाजार को पता चल चुका है कि ईरान घुटने टेक रहा है। संभावना यही है कि कतर और ओमान की मध्यस्थता से अगले कुछ घंटों में ईरान को वाशिंगटन की शर्तों पर झुकना पड़ेगा, क्योंकि सीधे युद्ध की स्थिति में ईरान का बचा-कुचा सैन्य ढांचा भी मलबे में तब्दील हो जाएगा।



