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मित्रता के मुखौटे में ब्लैकमेलिंग बंद करे अमेरिका, अपनी शर्तों पर झुकेगा नहीं आत्मनिर्भर भारत”

America should stop blackmailing under the guise of friendship; a self-reliant India will not bow to its terms.

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी का खोखला दावा अब वाशिंगटन की दादागिरी और व्यापारिक ब्लैकमेलिंग की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत के बीच ही अमेरिका द्वारा भारत के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत नए टैरिफ (सख्त प्रतिबंधों) का डर दिखाना वाशिंगटन के दोगलेपन को उजागर करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “खास दोस्त” बताने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन पीठ पीछे भारत की संप्रभुता और आर्थिक हितों पर लगातार चाबुक चलाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन नई दिल्ली ने भी अब रक्षात्मक रवैया छोड़ बेहद कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि भारत कोई अमेरिकी उपनिवेश नहीं है जो वाशिंगटन की हर अनुचित और मनमानी शर्त के आगे घुटने टेक दे।

रूस से तेल आयात कम करने के अमेरिकी दबाव और अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारतीय बाजारों में बिना शर्त रास्ता देने की ज़िद पर भारत का रुख अब पूरी तरह आक्रामक हो चुका है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक अनिश्चितता का माहौल खुद अमेरिका की एकतरफा नीतियों के कारण पैदा हुआ है, जहाँ वह बातचीत की मेज पर तो बैठता है लेकिन पीछे से प्रतिबंधों की तलवार लटकाए रखता है। सुरक्षा विश्लेषकों और भारतीय नेतृत्व ने दोटूक लहजे में स्पष्ट किया है कि यदि वाशिंगटन ने भारत को एक समान और संप्रभु साझेदार मानने के बजाय अपने हितों का ‘किरायेदार’ समझने की भूल की, तो भारत भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय स्वाभिमान की रक्षा के लिए अमेरिकी हितों को तगड़ा झटका देने से पीछे नहीं हटेगा। ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का मुकाबला अब भारत की ‘आत्मनिर्भर’ हुंकार से होगा।