‘आत्मसमर्पण करो या महाविनाश के लिए तैयार रहो’: ट्रम्प का ईरान को अंतिम अल्टीमेटम, होर्मुज की नाकेबंदी पर मंडराया तीसरे विश्वयुद्ध का साया

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा छद्म युद्ध अब पूर्ण सैन्य महासंग्राम के मुहाने पर आ खड़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तेहरान के हुक्मरानों को सीधी और अंतिम चेतावनी जारी करते हुए दो-टूक शब्दों में कहा है कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी को तुरंत खत्म कर अमेरिका की शर्तों पर समझौता नहीं किया, तो उसे ‘पूर्ण विनाश’ और ‘संपूर्ण आत्मसमर्पण’ (Total Surrender) के लिए मजबूर कर दिया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया और व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से गरजते हुए कहा कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के सबसे घातक हथियारों के साथ ‘लॉक एंड लोडेड’ अवस्था में मुस्तैद हैं। अमेरिकी रुख साफ है कि अब ईरान के पास बातचीत का स्वांग रचने का समय खत्म हो चुका है।
अमेरिकी राष्ट्रपति का यह आक्रामक बयान ऐसे समय में आया है जब फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में युद्धपोतों की तैनाती अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुकी है। ट्रम्प ने ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को ‘अत्यंत धोखेबाज़’ और ‘दुमुंहा’ करार देते हुए कहा कि एक तरफ तेहरान पर्दे के पीछे से तनाव घटाने की भीख मांगता है और दूसरी तरफ सार्वजनिक मंचों पर बातचीत से इनकार करने की अकड़ दिखाता है। अमेरिकी रणनीतिक कमान ने संकेत दिया है कि यदि अगले कुछ घंटों में होर्मुज से तेल टैंकरों का मार्ग पूरी तरह से बहाल नहीं हुआ, तो अमेरिकी वायुसेना ईरान के उन तमाम परमाणु ठिकानों, भूमिगत मिसाइल साइलो और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्यालयों को नामोनिशान से मिटा देगी, जिन्हें तेहरान अपनी ढाल समझता है।
इधर, पेंटागन ने फारस की खाड़ी में दो अतिरिक्त विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers) और दर्जनों स्टील्थ बॉम्बर्स तैनात कर दिए हैं। अमेरिकी नौसेना के सेंट्रल कमांड को स्पष्ट निर्देश दे दिए गए हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी करने की कोशिश करने वाले किसी भी ईरानी गश्ती जहाज या ड्रोन को देखते ही समंदर की गहराइयों में डुबो दिया जाए। अमेरिका का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को बंधक बनाने की ईरान की नापाक चाल को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 120 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुकी हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट गहरा गया है, लेकिन वाशिंगटन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह तेल संकट के दबाव में आकर तेहरान के आगे घुटने नहीं टेकेगा।
इस बीच, ईरान द्वारा ओमान के माध्यम से व्यापारिक जहाजों के लिए एक नया संकीर्ण रूट बनाने की कूटनीतिक पैंतरेबाज़ी को भी अमेरिका ने खारिज कर दिया है। वाशिंगटन का कहना है कि जलडमरूमध्य पर किसी भी प्रकार का ईरानी नियंत्रण स्वीकार्य नहीं होगा। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन अब किसी भी आधे-अधूरे समझौते के मूड में नहीं है और वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से नेस्तनाबूद (Denuclearisation) करने के बाद ही अपनी सैन्य आक्रामकता को रोकेगा। इस अल्टीमेटम के बाद पूरे मध्य पूर्व में किसी भी क्षण एक बहुत बड़े और विनाशकारी सैन्य संघर्ष के भड़कने का खतरा अपने चरम पर पहुंच गया है।




