Chakradhar Samaroh: The sixth evening came alive with Surendra Sharma's satire and Kavita Tiwari's spirited verses.

चक्रधर समारोह: सुरेंद्र शर्मा के व्यंग्य और कविता तिवारी के ओज से गुलज़ार हुई छठवीं शाम

रायगढ़ के रामलीला मैदान में 41वें चक्रधर समारोह की छठवीं सांस्कृतिक संध्या हास्य, व्यंग्य और ओजस्वी कविताओं के नाम रही। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन के मंच पर पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा की मौजूदगी ने श्रोताओं को बांधे रखा। अपनी चुटीली और सहज हास्य-व्यंग्य शैली के लिए पहचाने जाने वाले शर्मा ने जीवन की सच्चाइयों और बदलते परिवेश पर करारे कटाक्ष किए। देर रात तक मैदान तालियों की गूंज और ठहाकों से सराबोर रहा। चार दशकों से मंच साध रहे शर्मा ने ठहाकों के बीच यह संदेश भी पिरोया कि इंसान को जीवन में कितनी भी सफलता मिले, अहंकार से दूर रहना चाहिए।

कार्यक्रम में नारी शक्ति और सामाजिक सरोकारों की भी गूंज सुनाई दी। हास्य कवयित्री शशि सुरेंद्र दुबे ने बेटियों के महत्व और महिला सशक्तिकरण को रेखांकित करते हुए कहा कि बेटियां हर सुख-दुख में परिवार का संबल बनती हैं। वहीं, वीर रस की विख्यात कवयित्री कविता तिवारी ने सरस्वती वंदना से शाम का आगाज़ किया। उन्होंने नारी सम्मान और ओजपूर्ण रचनाओं से युवाओं में जोश भरा, तो ‘कोख में न मारो…’ जैसी पंक्तियों से माहौल को भावुक कर दिया।

सांस्कृतिक विविधता से सजी इस शाम में छत्तीसगढ़ी माटी की खुशबू भी महकी। गीतकार किशोर तिवारी ने “नया सूरज के नवा अंजोर” और “हरिहर धनिया” जैसे लोकगीतों से छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छाप छोड़ी। प्रख्यात हास्य कवि डॉ. प्रवीण शुक्ला ने सामाजिक विसंगतियों पर करारे व्यंग्य बाण चलाए, तो उज्जैन के डॉ. दिनेश दिग्गज ने भी अपनी हास्य रचनाओं से समां बांधा। वहीं अमन अक्षर के भावपूर्ण गीतों ने इस संध्या में सुरमयी मिठास घोल दी। विविध रसों से सजी यह शाम दर्शकों के लिए बेहद यादगार बन गई।

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