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अनुकंपा नियुक्ति बनी सहारा: पार्वती बुरका को मिला रोजगार, परिवार को मिली नई उम्मीद

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितकारी और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था का एक प्रेरक उदाहरण बीजापुर जिले में देखने को मिला, जहां कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे एक आदिवासी परिवार को समय पर सहायता देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया गया।

बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड स्थित कन्या आश्रम भट्टीगुड़ा में आदिवासी विकास विभाग के अंतर्गत भृत्य पद पर कार्यरत लक्ष्मी बुरका के निधन के बाद उनके परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया। परिवार के सामने आजीविका और भविष्य को लेकर कई चुनौतियां खड़ी हो गई थीं।

परिवार की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित पहल की और शासन के प्रावधानों के तहत उनकी पुत्री पार्वती बुरका को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी की। कलेक्टर विश्वदीप के मार्गदर्शन तथा आदिवासी विकास विभाग के सहयोग से पार्वती को भृत्य पद पर नियुक्ति आदेश सौंपा गया।

नियुक्ति मिलने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। पार्वती बुरका ने इसे केवल नौकरी नहीं, बल्कि अपनी मां की जिम्मेदारियों और सपनों को आगे बढ़ाने का अवसर बताया। उन्होंने पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का संकल्प भी व्यक्त किया।

यह पहल दर्शाती है कि शासन की संवेदनशील नीतियां और समय पर मिला सहयोग किसी भी परिवार को कठिन दौर से उबारकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ा सकता है। अनुकंपा नियुक्ति ने जहां परिवार को आर्थिक सुरक्षा दी है, वहीं भविष्य के प्रति नया विश्वास भी जगाया है।

यह उदाहरण बताता है कि सरकार की प्राथमिकता केवल योजनाओं का संचालन नहीं, बल्कि जरूरतमंद लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचाना और उन्हें सम्मानपूर्वक आत्मनिर्भर बनाना भी है। पार्वती बुरका की यह यात्रा संघर्ष, संकल्प और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।

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