भारत की संतुलित विदेश नीति की बढ़ी वैश्विक अहमियत, ईरान संकट के बीच दुनिया की नजर नई दिल्ली पर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों पर भारी अतिरिक्त खर्च की तैयारी के बीच भारत की संतुलित और दूरदर्शी विदेश नीति एक बार फिर वैश्विक मंच पर चर्चा का केंद्र बन गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने ईरान संकट से जुड़े सैन्य और रक्षा अभियानों के लिए 87.6 अरब डॉलर (करीब 8.3 लाख करोड़ रुपए) की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है, वहीं दूसरी ओर भारत ने लगातार संवाद, शांति और कूटनीतिक समाधान की वकालत कर अपनी जिम्मेदार वैश्विक भूमिका को मजबूत किया है।
अमेरिका में इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में सैन्य कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि संघर्ष की राह के बजाय संवाद और स्थिरता की नीति की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है। ऐसे समय में भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक संतुलित उदाहरण बनकर उभरा है।
इस बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है, जबकि ब्रेंट क्रूड 73.50 डॉलर तक पहुंच गया है। तेल कीमतों में आई यह नरमी भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। इससे घरेलू महंगाई नियंत्रण, औद्योगिक उत्पादन और आर्थिक विकास को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ गई है।
भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का एक और संकेत तब मिला जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का निमंत्रण भेजा। यह निमंत्रण भारत और ईरान के बीच गहरे रणनीतिक एवं सांस्कृतिक संबंधों की पुष्टि करता है। साथ ही यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत सभी पक्षों के साथ सकारात्मक संवाद बनाए रखने में सफल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने “राष्ट्रहित सर्वोपरि” की नीति पर चलते हुए अमेरिका, ईरान, खाड़ी देशों, रूस और यूरोप के साथ संतुलित संबंध स्थापित किए हैं। यही कारण है कि वैश्विक संकट के दौर में भारत की भूमिका केवल एक क्षेत्रीय शक्ति तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वह विश्वसनीय साझेदार और शांति समर्थक राष्ट्र के रूप में उभर रहा है।
ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के बीच परमाणु निरीक्षण को लेकर जारी मतभेदों के बीच भी भारत लगातार शांतिपूर्ण समाधान और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान की बात करता रहा है। यही दृष्टिकोण भारत को वैश्विक राजनीति में एक जिम्मेदार और भरोसेमंद शक्ति के रूप में स्थापित कर रहा है।




