RTI के सवाल पर भड़की अधिकारी, पत्रकार को दी केस की धमकी! सहकारिता विभाग पर उठे बड़े सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सहकारिता विभाग में पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला सहकारिता कार्यालय रायपुर में उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब एक पत्रकार ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत अधिकारी निधि पांडे की पदस्थापना से संबंधित आदेश की प्रति मांगी। आरोप है कि सामान्य जानकारी मांगने पर अधिकारी भड़क गईं और पत्रकार को केस करने तक की चेतावनी दे डाली।
घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अधिकारी बार-बार पत्रकार को कार्यालय से बाहर जाने के लिए कहती नजर आ रही हैं। वीडियो में वह यह भी कहती सुनाई देती हैं कि उनकी अनुमति के बिना वीडियो रिकॉर्ड करने पर वे कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं। वहीं पत्रकार का कहना है कि उन्हें धमकाया जा रहा था, इसलिए उन्होंने पूरी बातचीत रिकॉर्ड की।
पत्रकार का आरोप है कि उन्होंने सिर्फ इतना पूछा था कि संबंधित अधिकारी जिला सहकारिता कार्यालय में कब से पदस्थ हैं और उनकी पदस्थापना का आदेश उपलब्ध कराया जाए। लेकिन जानकारी देने के बजाय उन्हें “केस करने” और “अंजाम भुगतने” जैसी बातें सुनने को मिलीं।
जानकारी मांगो, धमकी पाओ
इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एक सरकारी अधिकारी की पदस्थापना से जुड़ी जानकारी देने में इतनी नाराजगी क्यों दिखाई गई? क्या विभाग में कुछ ऐसा है जिसे सार्वजनिक होने से रोका जा रहा है?
वर्षों से जमे अफसर
सहकारिता विभाग लंबे समय से विवादों और शिकायतों के कारण चर्चा में रहा है। आरोप लगते रहे हैं कि कुछ अधिकारी वर्षों से एक ही कार्यालय में पदस्थ हैं। आवासीय समितियों, बिल्डरों और सोसायटियों से जुड़े मामलों में भी विभाग की भूमिका को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।
विभाग में रिकॉर्ड गायब होने, उपस्थिति रजिस्टर उपलब्ध नहीं होने और सूचना देने में टालमटोल जैसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। ऐसे में RTI के जरिए मांगी गई जानकारी पर इस तरह की प्रतिक्रिया कई नए सवाल खड़े कर रही है।
लोकतंत्र का अधिकार या अधिकारियों की नाराजगी?
सूचना का अधिकार अधिनियम नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का अधिकार देता है। लेकिन अगर जानकारी मांगने पर नागरिकों और पत्रकारों को विरोध, दबाव या धमकी का सामना करना पड़े तो यह कानून की मूल भावना पर भी सवाल खड़े करता है।
पत्रकार का कहना है कि उनकी किसी अधिकारी से व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है और न ही वे किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ सार्वजनिक जानकारी प्राप्त करना है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित अधिकारी कितने समय से इस कार्यालय में पदस्थ हैं।




