सरकार ने ओटीटी से हटाई दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’, सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता पर आधारित थी कहानी

बॉलीवुड और पंजाबी सिनेमा के सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ (Satluj) को लेकर इस समय फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देशों और आईटी नियमों का हवाला देते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 ने इस फिल्म को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। यह फिल्म प्रसिद्ध सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता सरदार जसवंत सिंह खालरा के जीवन और 1984 के सिख दंगों के बाद पंजाब की परिस्थितियों पर आधारित है। फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहन ने हाल ही में खुलासा किया था कि इस बेहद संवेदनशील और सामाजिक मुद्दे पर बनी फिल्म के लिए दिलजीत दोसांझ ने एक भी रुपया फीस नहीं ली थी। फिल्म को अचानक हटाए जाने के बाद शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने सरकार के इस कदम की तीखी आलोचना की है और इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है।
वहीं दूसरी ओर, फिल्म फेडरेशन (FWICE) ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कलाकारों को फिल्मों का चयन करते समय देश की सुरक्षा और संप्रभुता को सर्वोपरि रखना चाहिए। दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर इस बैन पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “मैं इस अंधेरे को चुनौती देता हूं, मैं आखिरी सांस तक पंजाब के साथ खड़ा रहूंगा।” फिल्म के मेकर्स (RSVP) ने पुष्टि की है कि फिल्म अब भारत में वैध रूप से देखने के लिए उपलब्ध नहीं होगी। हालांकि, दिलजीत के फैंस ने राजस्थान और अन्य जगहों पर फिल्म की प्राइवेट स्क्रीनिंग के वीडियो शेयर किए हैं, जिसके बाद ZEE5 ने दर्शकों से अपील की है कि वे पायरेसी का समर्थन न करें और वे फिल्म की वापसी के लिए कानूनी रास्ते तलाश रहे हैं। इस विवाद ने एक बार फिर सिनेमा और राजनीतिक संवेदनशीलता के बीच की बहस को गरमा दिया है।



