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छत्तीसगढ़ में औषधीय खेती का बढ़ा दायरा, 12 हजार से अधिक किसानों को मिला प्रशिक्षण

धान उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाला छत्तीसगढ़ अब औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती के क्षेत्र में भी नई पहचान बना रहा है। राज्य में पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ विलुप्त होती सुगंधित और औषधीय धान प्रजातियों तथा हर्बल फसलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ उन्हें वैज्ञानिक खेती से जोड़ना है।

वन विभाग के अंतर्गत संचालित छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान राज्यभर के 12,041 किसानों को प्रशिक्षण और अध्ययन भ्रमण के माध्यम से आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी। इस पहल से किसानों को औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन की व्यावहारिक जानकारी मिल रही है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य की प्राकृतिक औषधीय संपदा किसानों के लिए आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बन सकती है। सरकार का प्रयास किसानों को पारंपरिक खेती के साथ वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी विकसित हो रहे हैं और छत्तीसगढ़ को हर्बल स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

औषधि पादप बोर्ड के मार्गदर्शन में 7,633 किसानों को वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें मिट्टी परीक्षण, खेत की तैयारी, जैविक खाद का उपयोग, फसल कटाई, वैल्यू एडिशन, पैकेजिंग, लैब टेस्टिंग और मार्केटिंग जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल रहीं। वहीं 4,408 किसानों को सफल औषधीय खेती परियोजनाओं का अध्ययन भ्रमण कराया गया, जहां उन्होंने अनुभवी किसानों से सीधे संवाद कर आधुनिक तकनीकों को समझा।

धमतरी जिले की महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष दुलारी बाई निषाद ने बताया कि पहले वे केवल पारंपरिक धान की खेती करती थीं, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उन्होंने औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती शुरू की। इससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और बाजार तक सीधी पहुंच भी बनी।

राज्य के कई जिलों में अब ब्राह्मी, वच, लेमनग्रास, खस और पचौली जैसी औषधीय फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है। योजना के तहत किसानों को उन्नत तकनीक और बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हो रही है। आने वाले समय में इस अभियान का विस्तार राज्य के अन्य जिलों तक करने की तैयारी है।

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