हरा सोना बना आदिवासियों की तरक्की का आधार, तेंदूपत्ता से 37 हजार परिवारों को 30.65 करोड़ का भुगतान

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में तेंदूपत्ता अब केवल एक लघु वनोपज नहीं, बल्कि हजारों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है। राज्य सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण की दर बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा किए जाने से संग्राहकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। समय पर भुगतान और बोनस की व्यवस्था ने ग्रामीणों का भरोसा भी मजबूत किया है, जिससे तेंदूपत्ता संग्रहण गांवों में रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है।
मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के घने वन क्षेत्रों में हर वर्ष गर्मी के मौसम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, विशेषकर महिलाएं, तेंदूपत्ता संग्रहण के कार्य से जुड़ती हैं। संग्रहण से प्राप्त आय का उपयोग परिवार बच्चों की पढ़ाई, घरेलू आवश्यकताओं और खेती-किसानी के कार्यों में कर रहे हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है।
वर्ष 2026 में जिले की 39 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के अंतर्गत 40 लॉट और 502 फड़ों के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण किया गया। इस दौरान 37,131 संग्राहक परिवारों ने 55,741.7 मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया, जिसके बदले उन्हें 30 करोड़ 65 लाख 79 हजार 350 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं फरवरी-मार्च 2026 में तेंदूपत्ता बूटा कटाई के लिए भी 40 लाख 51 हजार 154 रुपये की राशि वितरित की गई।
जिले का तेंदूपत्ता अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण बाजार में विशेष पहचान रखता है। इसी वजह से यहां के तेंदूपत्ता लॉट की मांग लगातार बनी रहती है और बेहतर कीमत मिलती है। वर्ष 2023 के संग्रहण के लिए 36 समितियों के 33,363 संग्राहक परिवारों को 11 करोड़ 97 लाख 98 हजार 934 रुपये बोनस देने की प्रक्रिया भी जारी है।
संग्रहण और बूटा कटाई की पूरी भुगतान प्रक्रिया प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से की जा रही है। राशि सीधे संग्राहकों के बैंक खातों में पहुंचने से व्यवस्था अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी भी इस व्यवस्था को सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बना रही है।




