रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत फिर चर्चा में! मॉस्को की तेल जरूरत पूरी करने पहुंचा भारतीय माल

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत का रूस के साथ ऊर्जा कारोबार एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में है। 20 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार रूस ने अपनी घरेलू ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से पेट्रोलियम उत्पाद मंगाए हैं। रॉयटर्स से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार भारत से 68 हजार टन गैसोलीन की खेप रूस के आर्कटिक बंदरगाह वितिनो पहुंची है और आगे भी ईंधन की खेप आने की उम्मीद है।
रूस कभी दुनिया के बड़े ईंधन निर्यातकों में शामिल रहा है, लेकिन यूक्रेन के हमलों में रूसी तेल रिफाइनरियों और ईंधन डिपो को नुकसान पहुंचने के बाद वहां घरेलू ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। रूस ने घरेलू जरूरतों को देखते हुए ईंधन निर्यात पर रोक लगाई है और देश में ईंधन की खरीद पर सीमाएं भी लगाई गई हैं।
भारत लंबे समय से रूस के साथ ऊर्जा व्यापार बनाए हुए है। जुलाई में भारत के तेल आयात में रूसी कच्चे तेल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की खबर सामने आई थी।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस के साथ ऊर्जा कारोबार को जारी रखा है। भारत का रुख रहा है कि ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के आधार पर उसे अपने लिए उपलब्ध तेल स्रोतों का इस्तेमाल करना होगा। वहीं पश्चिमी देशों की ओर से रूस के ऊर्जा कारोबार पर दबाव बना हुआ है।
अब रूस द्वारा भारत से तैयार ईंधन की खरीद यह दिखाती है कि युद्ध और प्रतिबंधों के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार किस तरह बदल रहा है। भारत जहां रूसी कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बना हुआ है, वहीं रूस को भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों की जरूरत पड़ रही है।
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