रूस पर यूक्रेन का ताबड़तोड़ हमला, मॉस्को में तेल संकट; भारत बना ऊर्जा मोर्चे का अहम खिलाड़ी

रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर खतरनाक करवट ली है। यूक्रेन के हमलों का असर रूस की ऊर्जा व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है और मॉस्को में पेट्रोल के लिए लंबी कतारों की खबर सामने आई है। रूसी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों के बाद ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।
इस पूरे संकट में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। रूस भारत के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत बना हुआ है और युद्ध के दौरान भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखकर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया है। Reuters के अनुसार जून 2026 में भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था, जब रिफाइनरों ने दूसरे स्रोतों की आपूर्ति में बाधा के बीच रूसी तेल की खरीद बढ़ाई।
अब रूस खुद अपनी रिफाइनिंग क्षमता पर हमलों के कारण दबाव में है। जुलाई में Reuters ने रिपोर्ट किया था कि रूसी ऊर्जा कंपनियों ने यूक्रेनी हमलों से प्रभावित रिफाइनिंग क्षमता के बाद भारतीय रिफाइनरों से और गैसोलीन खरीदने के लिए संपर्क किया था।
यानी युद्ध की आग अब सिर्फ यूक्रेन के शहरों तक सीमित नहीं है। इसका असर रूस की ऊर्जा व्यवस्था और उसके अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ रहा है। भारत इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम ऊर्जा बाजार के रूप में सामने है।
इधर यूक्रेन ने रूस पर लगातार हमले तेज किए हैं। 21 अगस्त को रूस के ड्रोन हमले में यूक्रेन के क्रिवी रिह में एक शॉपिंग सेंटर पर कम से कम 16 लोगों की मौत और 130 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर सामने आई।
भारत के सामने चुनौती साफ है—रूस के साथ ऊर्जा संबंध बनाए रखते हुए युद्ध से पैदा होने वाले अंतरराष्ट्रीय दबाव को संभालना।
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