दुनिया को भारत की दो टूक चेतावनी! समुद्री रास्तों से खिलवाड़ पड़ा भारी तो टूट सकती है ग्लोबल सप्लाई चेन

भारत ने 26 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय मंच पर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। भारत ने कहा कि सुरक्षित और भरोसेमंद समुद्री रास्ते तथा समुद्री ढांचे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए बेहद जरूरी हैं। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की।
भारत का यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। Reuters के मुताबिक, हॉर्मुज से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है।
ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज में अस्थायी नौवहन गलियारा बनाने और समुद्री रास्ते को सुरक्षित करने को लेकर बातचीत फिर शुरू हुई है। इसके बावजूद क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
भारत के लिए यह संकट इसलिए भी गंभीर है क्योंकि ऊर्जा, खाद, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही समुद्री मार्गों पर निर्भर करती है। भारत ने इसी वजह से समुद्री मार्गों की सुरक्षा को केवल किसी एक देश का मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक सुरक्षा का विषय बताया है।
भारत की चिंता साफ है—अगर समुद्री रास्तों पर तनाव बढ़ा तो इसका असर सिर्फ जहाजों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा प्रभाव तेल, गैस, खाद्य सामग्री और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ सकता है।
भारत ने इस मामले में किसी एक पक्ष के समर्थन के बजाय सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवाजाही की मांग की है। यही वजह है कि हॉर्मुज संकट पर भारत का रुख अब वैश्विक समुद्री सुरक्षा की बहस में महत्वपूर्ण हो गया है।
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