चीन से फिर आमना-सामना! डोभाल-वांग वार्ता में भारत ने साफ कर दिया—सीमा पर अब कोई ढिलाई नहीं

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर 26 अगस्त 2026 को अहम कूटनीतिक गतिविधि हुई। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बीजिंग में बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने सीमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की और सीमा प्रश्न के राजनीतिक समाधान की दिशा में काम जारी रखने पर सहमति जताई।
भारत की ओर से सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने को महत्वपूर्ण बताया गया है। भारत का स्पष्ट रुख है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों के आगे बढ़ने के लिए जरूरी है। सीमा विवाद का समाधान भारत-चीन संबंधों के लिए सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बना हुआ है।
डोभाल और वांग की बातचीत ऐसे समय हुई है जब दोनों देश आगामी BRICS शिखर सम्मेलन से पहले संबंधों को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है।
भारत और चीन के बीच लंबे समय से सीमा को लेकर तनाव रहा है। ऐसे में बातचीत का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कूटनीतिक बैठकों से वास्तविक सीमा समाधान की दिशा में ठोस प्रगति होगी।
भारत की तरफ से सीमा पर शांति को संबंध सुधार की बुनियादी शर्त माना जा रहा है। यानी व्यापार, कूटनीति और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की बात अपनी जगह है, लेकिन सीमा विवाद को नजरअंदाज करके संबंधों को सामान्य नहीं माना जा सकता।
अब निगाह इस बात पर है कि डोभाल-वांग वार्ता के बाद जमीन पर क्या बदलाव दिखाई देता है। बातचीत जरूर आगे बढ़ रही है, लेकिन भारत के लिए सीमा सुरक्षा का मुद्दा किसी भी तरह की नरमी से बड़ा है।
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