अमेरिका का नया दबाव, भारत पर फिर निशाना! व्यापार समझौते के बीच बढ़ी टकराव की तपिश

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन अमेरिकी व्यापार नीतियों ने नई दिल्ली के सामने दबाव बढ़ा दिया है। जुलाई में अमेरिका ने भारत सहित 60 व्यापारिक साझेदारों पर नई शुल्क व्यवस्था लागू की थी। भारत ने इसके बावजूद अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
25 जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने भारत से आने वाले कुछ सामान पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया। भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि करीब 45 प्रतिशत भारतीय निर्यात इस नए शुल्क के दायरे से बाहर रहेगा, जबकि बाकी करीब 55 प्रतिशत निर्यात पर नया शुल्क लागू होगा।
इसके बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की बातचीत पूरी तरह बंद नहीं हुई। भारत ने कहा कि वह अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेगा और सेक्टर आधारित मुद्दों पर चर्चा करेगा।
22 जुलाई को एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अगले तीन से चार महीने में पूरा हो सकता है। हालांकि इसके लिए अमेरिकी सेक्शन 301 जांच सहित कुछ प्रक्रियाएं पूरी होना जरूरी बताई गई थीं।
अमेरिकी नीतियों का भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र पर भी असर पड़ सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेनेरिक दवाओं पर भविष्य में शुल्क लगाने की बात कही थी। भारत अमेरिका के लिए जेनेरिक दवाओं का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है।
भारत की तरफ से साफ संकेत है कि व्यापार समझौता चाहिए, लेकिन बातचीत राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर होगी। ऐसे में भारत-अमेरिका संबंधों में सहयोग और दबाव दोनों साथ-साथ दिखाई दे रहे हैं।
ये खबर भी पढ़ें—:


