कृत्रिम पैर से कमलेश के सपनों को मिले नए कदम, चिरायु कार्यक्रम ने बदली 10 वर्षीय बच्चे की जिंदगी

उम्र महज 10 साल, लेकिन सपने बड़े हैं और उन्हें पूरा करने का हौसला भी मजबूत। बीजापुर जिले के ग्राम पीडिया निवासी कमलेश ओयम के जीवन में अब उम्मीदों की नई शुरुआत हुई है। चलने-फिरने में आने वाली कठिनाइयों के बीच चिरायु कार्यक्रम ने कमलेश के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। उसे दाएं पैर का कृत्रिम अंग उपलब्ध कराया गया है, जिससे अब उसके सपनों को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
कमलेश के पिता का नाम सुक्कू है और वह वर्तमान में दंतेवाड़ा जिले के आवरगा स्थित सक्षम आवासीय विद्यालय में पढ़ाई कर रहा है। पढ़ाई और स्कूल की गतिविधियों में आगे बढ़ने की चाह रखने वाले कमलेश के लिए चलना-फिरना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उसकी जरूरत की पहचान की गई, जिसके बाद चिरायु कार्यक्रम के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उसे कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया गया।
जिला अस्पताल दंतेवाड़ा में कृत्रिम पैर लगाए जाने के बाद कमलेश के जीवन में नई उम्मीद जगी है। अब उसके लिए स्कूल परिसर में आना-जाना, रोजमर्रा के काम करना और अपने साथियों के साथ गतिविधियों में हिस्सा लेना पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकेगा।
कमलेश के लिए यह कृत्रिम पैर सिर्फ एक स्वास्थ्य सुविधा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाया गया बड़ा कदम है। इससे वह अपनी पढ़ाई और भविष्य के सपनों को अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा सकेगा। परिवार के लिए भी यह खुशी और राहत का पल है कि उनके बच्चे को समय पर उसकी जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सुविधा मिली।
चिरायु कार्यक्रम के तहत बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान कर उन्हें जरूरी उपचार और सुविधाओं से जोड़ा जाता है। कमलेश को कृत्रिम पैर उपलब्ध कराया जाना इसी पहल का एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
कमलेश की जिंदगी में आया यह बदलाव केवल चलने की सुविधा तक सीमित नहीं है। यह उसके भीतर नया आत्मविश्वास जगाने वाला कदम है, जो बताता है कि मुश्किलें भले ही रास्ते में रुकावट बनें, लेकिन मजबूत हौसले और सही सहयोग से सपनों की मंजिल तक पहुंचने का सफर जारी रखा जा सकता है।



