देश की ताज़ा खबरें | Fourth Eye News

ISRO के निजीकरण की ‘इन-स्पेस’ साजिश पर वैज्ञानिक बिफरे, क्या भारतीय अंतरिक्ष संप्रभुता को बेचा जा रहा है?

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने संगठन के निजीकरण की दिशा में उठाए जा रहे कदमों पर तीखा विरोध दर्ज कराया है। IN-SPACe के अध्यक्ष पवन गोयनका के इस बयान के बाद कि इसरो अब रॉकेट या लॉन्च व्हीकल का निर्माण नहीं करेगा, संगठन के अंदर असंतोष का भयानक ज्वालामुखी फूट पड़ा है। कर्मचारियों ने सीधे इसरो चेयरमैन को पत्र भेजकर इस राष्ट्रघाती फैसले पर जवाब मांगा है।

अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने अपनी जिस स्वदेशी मेधा और संप्रभुता के दम पर परचम लहराया है, उसे कुछ कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में सौंपने की यह साजिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जा सकती। जब पूरी दुनिया भारत के सस्ते और अचूक लॉन्च व्हीकल्स की कायल है, तब देश की इस महारत्न धरोहर का गला घोंटने की कोशिश कौन कर रहा है? इसरो भारत का स्वाभिमान है और इसे किसी निजी मुनाफे की बलि चढ़ाने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती। भारत की अंतरिक्ष संप्रभुता केवल और केवल देश के हाथों में सुरक्षित रहेगी।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी को अपनी शर्तों पर दुनिया पर राज करना चाहिए, न कि निजी कंपनियों के लिए बैक-ऑफिस बनकर रहना चाहिए।

ये खबर भी पढ़ें —:

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button